राजनीति

एक बार फिर थरूर का तंज, कहा- मोदी सफेद घोड़े पर सवार तलवार लेकर बैठा हीरो

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 4 , 2018 , 15:42 IST

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फिर तंज कसा है। शनिवार को यहां मीडिया से कहा- वह एक सफेद घोड़े पर हाथ में तलवार लेकर बैठा हीरो है जो कहता है कि मैं सारे जवाब जानता हूं। मोदी एक व्यक्ति की सरकार हैं और हर कोई उनके इशारे पर नाच रहा है भारत में अभी इतिहास का सबसे केंद्रीकृत प्रधानमंत्री कार्यालय है।

इससे पहले पहले 28 अक्टूबर को थरूर ने मोदी की तुलना बिच्छू से की थी। उन्होंने कहा था- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस के लिए शिवलिंग पर बैठे बिच्छू की तरह हैं, जिसे न तो हाथ से हटाया जा सकता है और न ही चप्पल मारी जा सकती है। मोदी के इस बयान पर शनिवार को हैदराबाद की सायदाबाद थाने में थरूर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। यह शिकायत रंगा रेड्डी जिले के भाजपा प्रवक्ता करुणा सागर काशिम शेट्टी ने दर्ज कराई है।

संभव है राहुल अगले चुनाव में प्रधानमंत्री पद का चेहरा न हों

अगले लोकसभा चुनावों के मुद्दे पर थरूर ने कहा कि कांग्रेस और बाकी विपक्षी दलों के बीच चुनाव से पहले और बाद में गठबंधन होंगे। लेकिन हो सकता है राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद का चेहरा न हों। उन्होंने कहा भाजपा के मुकाबले कांग्रेस में बहुत वरिष्ठ नेता हैं। हमारे पास प्रणब मुखर्जी जैसे लोग थे। पी चिदंबरम और अन्य हैं, जिनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है।

राम मंदिर मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश

थरूर ने कहा, ‘‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे ध्यान भटकाने वाले हैं। मैं भारतीय लोगों से अपील करूंगा कि वे ध्यान भटकाने वाले मुद्दों से दूर रहें और भारतीयों की जिंदगी और हकीकत पर ध्यान दें। हकीकत यह है कि भारतीय आम आदमी पिछले साढ़े चार साल से परेशान है।

मेरे खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दायर करना ओछी हरकत

थरूर ने अपने खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि के केस को ओछी हरकत करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा करना अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने जैसा है। यह केस दिल्ली की अदालत में भाजपा नेता राजीव बब्बर ने दायर किया था। थरूर ने कहा, ‘‘मैंने जो बयान दिया था वह 2012 में एक मैगजीन में छपा था। उसमें यह बयान संघ के एक अनाम नेता के हवाले से दिया गया था। ऐसे में मेरे खिलाफ मानहानि दावा करने का क्या औचित्य है?...अगर हम प्रकाशित सामग्री उद्धृत करने के लिए लोगों के अधिकार को बाधित करना शुरू करते हैं तो हमारा लोकतंत्र कहां जाता है?’’


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