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जल संकट से शिमला में हाहाकार, सिर्फ एक बाल्टी पानी की शर्त पर मिल रहे हैं होटल

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 29 , 2018 , 20:17 IST

पहाड़ों की रानी शिमला के इतिहास में पहली बार पानी का काफी ज्यादा संकट खड़ा हो गया है। पिछले 10-12 दिनों से पानी नहीं आ रहा है। लोग बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। ऊपर से टूरिजम सीजन में सैलानियों की बाढ़ ने पूरा सिस्टम ही बिगाड़ दिया है। होटल कारोबारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। घरों में पीने और खाना बनाने के लिए पानी तक नहीं है। लोग हफ्ते से ज्यादा नहाए हुए हो गए हैं। लोगों का सब्र जवाब दे रहा है।

मैदानी इलकों में बढ़ रही गर्मी से राहत पाने के लिए हजारों पर्यटक शिमला पहुंच रहे हैं। हालांकि यहां पानी की किल्लत के कारण होटल मालिक उन्हें कमरे नहीं दे पा रहे हैं। शहर में सड़क के साथ होटलों के मालिक भी एक या दो बाल्टी पानी मिलने की शर्त पर ही पर्यटकों को कमरा दे रहे हैं।

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हालात ऐसे हो गए हैं कि पानी की किल्लत के कारण कई रेस्तरां मालिकों ने शौचालय में ताला लटका दिया है। सोमवार को भी शिमला शहर में करीब 20 हजार पर्यटकों ने दस्तक दी। शहर में सुबह से ट्रैफिक जाम व पार्किंग फुल रही। यहां तक कि लिफ्ट के लिए भी पर्यटकों की लंबी कतार दिन भर लगी रही। शिमला में 60 फीसद होटलों में पर्यटकों को ठहराने से इनकार कर दिया गया। होटलों में 20 से 25 फीसदी तक ऑक्यूपेंसी।

शहर में पानी की किल्लत के कारण रेस्तरां में पर्यटकों सहित अन्य ग्राहकों को शौचालय में न जाने की अपील की जा रही है। टैंकरों से पानी मंगवाया जा रहा है। ऐसे में उससे खाना बना पा रहे हैं। कई होटल मालिकों ने तो पानी की सप्लाई न मिलने के कारण होटल ही बंद कर दिए हैं। जो होटल सड़क के साथ हैं, वहां पर भी पर्यटकों को एक से दो बाल्टी पानी देकर काम चला रहे हैं।

जल संकट के चलते प्राइवेट वाटर टैंकर ऑपरेटरों ने रेट दोगुने कर दिए हैं। 4000 लीटर क्षमता वाले टैंकर का रेट 2500 से बढ़ाकर सीधा 5000 रुपये कर दिया गया है। राजधानी शिमला में पानी की किल्लत से पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। शहर में पानी न आने की वजह से बिगड़ते हालात देखकर हाईकोर्ट ने मंगलवार को नगर निगम कमिश्नर और म्यूनिसिपल इंजीनियर को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

शिमला में जल संकट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर की चार करोड़ लीटर यानी 40 एमएलडी के मुकाबले सिर्फ 1 करोड़ 90 लाख लीटर यानी 19 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। पानी की कमी के चलते पहली बार तीनों न्यायालयों में सोमवार को काम बंद रहा। हाईकोर्ट समेत जिला सत्र न्यायालय औऱ प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में भी पानी की कमी के चलते काम नहीं हो पाया।

पानी के संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आपात बैठक बुलाकर हालात पर कंट्रोल करने के आदेश दिए। इस बैठक के बाद मुख्य सचिव विनीत चौधरी स्वयं नगर निगम के कंट्रोल रूम में पहुंचे। फिर नगर निगम के अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया।


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