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Guru Nanak Jayanti: गुरु नानकदेव की 550वीं जयंति, सच्चाई, सेवा और सद्भाव का पर्व

दीपक गुप्ता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 23 , 2018 , 11:57 IST

आज कार्तिक पूर्णिमा है। इसे प्रकाश पर्व के रुप में भी मनाया जाता है। सिख धर्म के अनुयायियों के लिए इसका विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिखों के पहले गुरु, गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था। इस दिवस को सिख धर्म में प्रकाशोत्सव या प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इसे गुरु नानक जयंती भी कहते हैं।

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बाबा नानक की जयंती पर गुरुद्वारों में खास पाठ का आयोजन होता है। सुबह से शाम तक की‍र्तन चलता है और गुरुद्वारों के साथ ही घरों में भी खूब रोशनी की जाती हैष इसके अलावा, लंगर छकने के लिए भी भीड़ उमड़ती है।

गुरु नानक देव की जयंति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो ट्वीट किया है। इसमें पीएम मोदी की आवाज है। पीएम वीडियो में गुरु नानक के संदेश को दोहरा रहे हैं। सेवा, सच्चाई और सत्कर्म का संदेश आज भी लोगों में सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है।

बता दें कि बाबा नानक की 550 की जयंति से ठीक एक दिन पहले मोदी सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी देकर सिख समुदाय को बड़ा तोहफा दिया है। करतारपुर कॉरिडोर की मांग लंबे समय से सिख समुदाय कर रहा था।

गुरु नानकदेव के अनमोल दोहे

जगत में झूठी देखी प्रीत।

अपने ही सुखसों सब लागे, क्या दारा क्या मीत॥

मेरो मेरो सभी कहत हैं, हित सों बाध्यौ चीत।

अंतकाल संगी नहिं कोऊ, यह अचरज की रीत॥

मन मूरख अजहूं नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत।

नानक भव-जल-पार परै जो गावै प्रभु के गीत॥

एक ओंकार सतिनाम, करता पुरखु निरभऊ।

निरबैर, अकाल मूरति, अजूनी, सैभं गुर प्रसादि ।

हुकमी उत्तम नीचु हुकमि लिखित दुखसुख पाई अहि।

इकना हुकमी बक्शीस इकि हुकमी सदा भवाई अहि ।

सालाही सालाही एती सुरति न पाइया।

नदिआ अते वाह पवहि समुंदि न जाणी अहि ।

पवणु गुरु पानी पिता माता धरति महतु।

दिवस रात दुई दाई दाइआ खेले सगलु जगतु ।।

हरि बिनु तेरो को न सहाई।

काकी मात-पिता सुत बनिता, को काहू को भाई।

धनु धरनी अरु संपति सगरी जो मानिओ अपनाई।

तन छूटै कुछ संग न चालै, कहा ताहि लपटाई।

दीन दयाल सदा दु:ख-भंजन, ता सिउ रुचि न बढाई।

नानक कहत जगत सभ मिथिआ, ज्यों सुपना रैनाई।।


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