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श्रीनिवास रामानुजन: जन्मदिन पर जानें उनसे जुड़ी खास बातें

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| दिसंबर 22 , 2017 , 13:50 IST

श्रीनिवास रामानुजन एक महान भारतीय गणितज्ञ थे। उन्हे आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में गिना जाता है। उन्हे गणित में कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला, फिर भी उन्होंने विश्लेषण एवं संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में गहन योगदान दिए। इन्होंने अपने प्रतिभा और लगन से न केवल गणित के क्षेत्र में अद्भुत अविष्कार किए और भारत को अतुलनीय गौरव भी प्रदान किया।

आरंभिक जीवनकाल :-
आज की ही तारीख यानि 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के ईरोड गांव में श्रीनिवास अय्यांगर और कोमलतामल के घर एक बच्चा पैदा हुआ था, नाम रखा गया रामानुजन। आगे जाकर ये क्या करने वाला है किसी को कुछ पता नही था। रामानुजन् के पिता एक साड़ी की दुकान पर क्लर्क और माँ हाऊस वाइफ थी। रामानुजन् के सभी भाई-बहन बचपन में मर गए। दरअसल, 1889 में चेचक नाम की बीमारी फैल गई थी, इस साल चेचक से तंजावुर जिले में हजारों लोग मारे गए थे। लेकिन रामानुजन् फिर से ठीक हो गए।

ये आधुनिक भारत के बहुत प्रसिद्ध गणितज्ञ हैं गणित में पाई के अध्ययन का तरीका उनका बहुत बड़ा योगदान है।

श्रीनिवास रामानुजन से जुड़ी खास बातें:

1)- करीबी बताते है कि रामानुज़न पैदा होने के 3 साल तक बोले नही थे। घरवालों ने सोचने लगे थे कहीं ये गूँगा तो नही है। 10 साल की उम्र में रामानुज प्राइमरी क्लास में जिले में पहले नंबर पर आए।

2)- बचपन में रामानुजन् स्कूल जाने से बचते थे, इनके घरवालों ने ये देखने के लिए स्पेशल एक आदमी की ड्यूटी लगाई थी कि रामानुज़न् ने आज स्कूल भी लगाया है या नही।

3)- घर का खर्च निकालने के लिए रामानुजन् बचपन में ट्यूशन पढ़ाया करते थे, इन्हें ट्यूशन के हर महीने 5 रूपए मिलते थे। रामानुजन् थे सातवीं कक्षा में और ट्यूशन पढ़ाते थे बी. ए. के लड़के को।

4)- 13 साल की उम्र में खुद की थ्योरम बनाने वाले रामानुजन् ने मैथ की कभी कोई अलग से ट्रेनिंग नही ली।

5)- रामानुज़न् ने 11 साल की उम्र में, काॅलेज के स्तर का मैथ याद कर लिया था, 13 साल की उम्र में, एडवांस ट्रिग्नोमेट्री को रट दिया और खुद की थ्योरम बनाने लगे। 17 साल की उम्र में, बर्नोली नंबरों की जाँच की और 15 डेसिमल प्वाॅइंट तक यूलर(Euler) कांस्टेंट की वैल्यू खोज दी थी।

6)- जब रामानुजन् 16 साल के थे, तो उनके दोस्त ने लाइब्रेरी से जी. एस. कार की लिखी हुई एक किताब दी “A Synopsis of Elementary Results in Pure and Applied Mathematics”, इसमें 5000 से ज्यादा थ्योरम थी। रामानुज़न् ने ये किताब सारी पढ़ डाली पूरे ध्यान से। बस यहीं से उनके मैथ जीनियस बनने का सफ़र शुरू हो गया।

7)- रामानुजन् अपने मैथ के पेपर को आधे से भी कम समय में पूरा कर देते थे।

8)-गणित में जीनियस होने के कारण रामानुज़न् को सरकारी आर्ट्स काॅलेज में पढ़ाई करने के लिए स्काॅलरशिप मिली थी, लेकिन इन्होनें मैथ में इतना ध्यान लगाया, इतना ध्यान लगाया कि बाकी सभी सब्जेक्ट में फेल हो गए। इससे इनकी स्काॅलरशिप भी छिन ली गई।

9)- पेपर बहुत महंगे होने के कारण रामानुजन् मैथ के सवाल निकालने के लिए ‘स्लेट’ का यूज करते थे, हालांकि ये एक रजिस्टर भी रखते थे जिसमें स्लेट से फाॅर्मूला उतारते थे। रामानुजन् जब कही नौकरी की तलाश में जाते थे तो अक्सर यही रजिस्टर दिखाते थे लेकिन लोग इसे नजरअंदाज कर देते थे।

10)- जब रामानुज़न् 22 साल के हो गए तो 10 साल की जानकी से इनका ब्याह कर दिया गया।

11)- 1913 में 26 साल की उम्र में रामानुजन् ने मैथ के 120 सूत्र लिखे और अंग्रेज प्रोफेसर जी. एच. हार्डी के पास भेज दिए, हार्डी ने पहले तो खास ध्यान नही दिया लेकिन पढ़ने के बाद उसे लगा कि ये तो कोई विद्वान है। फिर क्या था बुला लिया रामानुज को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी।

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12)- रामानुजन् के बारे में एक तथ्य और बता दूँ, जब वो इंग्लैंड में थे तो उन्होनें आत्महत्या करने की सोची थी लेकिन मौके पर पुलिसकर्मी ने पकड़ लिया, पुलिसवाला जेल में भेजने ही वाला था तो प्रोफेसर हार्डी ने इसमें हस्तक्षेप किया और पुलिसकर्मी से झूठ बोला कि रामानुजन् एफआरएस(Fellow of Rayal Society) का सदस्य है और तुम इस तरह एक एफआरएस को जेल में नही भेज सकते। कुछ महीने बाद रामानुज़न् सच में FRS का सदस्य बन गए।

13)- रामानुजन् ने अपनी 32 साल की लाइफ में 3884 इक्वेशन बनाईं। इनमें से कई तो आज भी अनसुलझी है, मैथ में 1729 को रामानुजन् नंबर के नाम से जाना जाता है।

14)- . भारतीय राज्य तमिलनाडु, रामानुजन् के जन्मदिन को IT Day के रूप में और पूरा देश National Mathematics Day के रूप में मनाता है।

15)-  श्रीनिवास रामानुजन् को “Man Who Knew Infinity” कहा जाता है क्योकिं इनके प्रमुख योगदान में से 60% से ज्यादा Infinite series के सूत्र थे।

रामानुजन की कार्यशैली और शोध:

रामानुजन और इनके द्वारा किए गए अधिकांश कार्य अभी भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बने हुए हैं। एक बहुत ही सामान्य परिवार में जन्म ले कर पूरे विश्व को आश्चर्यचकित करने की अपनी इस यात्रा में इन्होने भारत को अपूर्व गौरव प्रदान किया।

इनका उनका वह पुराना रजिस्टर जिस पर वे अपने प्रमेय और सूत्रों को लिखा करते थे 1976 में अचानक ट्रिनीटी कॉलेज के पुस्तकालय में मिला। करीब एक सौ पन्नों का यह रजिस्टर आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बना हुआ है।

इस रजिस्टर को बाद में रामानुजन की नोट बुक के नाम से जाना गया। मुंबई के टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान द्वारा इसका प्रकाशन भी किया गया है।

मृत्यु :-

इनका गिरता स्वास्थ्य सबके लिए चिंता का विषय बन गया और यहां तक की अब डॉक्टरों ने भीजवाब दे दिया था। अंत में रामानुजन के विदा की घड़ी आ ही गई। 26 अप्रैल1920 के प्रातः काल में वे अचेत हो गए और दोपहर होते होते उन्होने प्राण त्याग दिए। इस समय रामानुजन की आयु मात्र 33 वर्ष थी। इनका असमय निधन गणित जगत के लिए अपूरणीय क्षति था। पूरे देश विदेश में जिसने भी रामानुजन की मृत्यु का समाचार सुना वहीं स्तब्ध हो गया।

 


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