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Review: दर्शकों को पसंद आ रही है देसी तड़के से भरपूर ‘शुभ मंगल सावधान’

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| सितंबर 1 , 2017 , 15:30 IST

इस हफ्ते यानी 1 सितंबर को आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर स्टारर फिल्म ‘शुभ मंगल सावधान’सिनेमाघरों में रिलीज हो गयी है। फिल्म के पहले शो के बाद फैंस से मिली प्रक्रिया से पता चलता है की यह फिल्म दर्शकों को पसंद आ रही है। दर्शक इस फिल्म को सराह रहे है। इस फिल्म को आनंद एल राय बाल्की ने प्रोड्यूस किया है। आरएस प्रसन्ना के निर्देशन में बनी फिल्म ‘शुभ मंगल सावधान’ में आपको आयुष्मान और भूमि के रूप में एक नॉन हॉट और नॉन कूल जोड़ा देखने को मिलेगा फिल्म में आयुष्मान खुराना और भूमि पडनेकर मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।

खास बात यह कि 'शुभ मंगल सावधान' 2013 की तमिल फिल्म ‘कल्याण समायल साधम’ की रीमेक है। आर. एस. प्रसन्ना ने ही इसके तमिल संस्करण को भी डायरेक्ट किया था। कहानी में एक यह बात खटकती है कि फिल्म एक पॉइंट पर आकर अपने विषय से भटक जाती है। फिल्‍म का फर्स्‍ट हाफ कॉमेडी भरा है तो दूसरा थोड़ा गंभीर हो जाता है। फिल्म में कुछ सीन ऐसे भी है, जिसमें आपको कभी हंसी आएगी, तो कभी आप कैरेक्टर्स के साथ चिंता में पड़ जाएंगे।


कहानी -

यह कहानी मुदित (आयुष्मान) और सुगंधा (भूमि पेडनेकर) की है। दोनों दिल्ली के रहने वाले हैं। दोनों के बीच रिश्ता कायम होता है। इसी सब के बीच मुदित को मेल परफॉर्मेंस एनजाइटी (Male Performance Anxiety) की समस्या सामने आती है। यह तब पता चलता है जब कई मौकों पर मुदित और सुगंधा करीब आने की कोशिश करते हैं। मुदित सुगंधा को निराश करता है। इस तरह जब मुदित की समस्या सामने आती है तो सुगंधा के घरवाले शादी से मना करते हैं, लेकिन मुदित को शादी करनी है तो सिर्फ सुगंधा से। यहां सुगंधा हर मौके पर मुदित का साथ देती है, और उसकी ताकत बनती है। बस यह मूवी इसी विषय पर बनी है हालांकि जिस तरीके से डायरेक्टर ने चीजों को दर्शाया है, वो बहुत ही मजाकिया लगता है।

परफॉर्मेंस-

मुदित के किरदार में आयुष्मान खुराना एकदम परफेक्ट लगे हैं। चाहे वो शर्मीलापन हो या पौरुष को लेकर प्रॉब्लम, चेहरे पर हर भाव आयुष्मान ने बखूबी निभाया और दिखाया है। वहीं भूमी पेडनेकर ने भी अपने शानदार अभिनय से साबित कर दिया है कि क्यों उन्हें बॉलीवुड की सबसे प्रॉमिसिंग अभिनेत्री माना जा रहा है। आयुष्मान के साथ भूमी की बेहतरीन केमिस्ट्री आपको खुश कर जाएगी। दूसरी तरफ सीमा पहवा ने भी अपने दमदार टैलेंट से हर सीन को यादगार बना दिया है। वहीं ब्रिजेश काला अपने किरदार में इतने परफेक्ट लगे हैं कि उन्हें देखकर आपको अपने नखरीले रिश्तेदारों की याद आ जाएगी।

म्यूजिक-

तनिष्क-वायु के गाने फिल्म की सिचुएशन में बेहतरीन तरीके से फिट होते हैं लेकिन एल्बम के तौर पर कुछ खास नहीं लगते। फिल्म के गाने रॉकेट सैंय्या के अलावा कोई भी गाना ऑडिएंस को खास इंप्रेस करता नहीं दिखता।

कमज़ोर कड़िया -

फिल्म का फर्स्ट हाफ देखकर आप हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएंगे। लेकिन इंटरवल के बाद आपको लगेगा कि मूवी खिंच रही है। सेकंड हाफ और क्लाइमेक्स को अच्छा बनाया जा सकता था, लेकिन फिल्म के आखिर तक आपको सरप्राइज नहीं मिलेगा।
फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने भी फिल्म को एवरेज बताया है। उन्होंने ट्वीट किया, 'फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी एंटरटेनिंग है, लेकिन सेकंड हाफ रूटीन जैसा है। वहीं क्लाइमेक्स कमजोर है।'


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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