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मौलाना आजाद: जिन्होंने 'एक भारत' के लिए जिन्ना को भी मना लिया था

icon सतीश कुमार वर्मा | 0
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| नवंबर 11 , 2018 , 13:07 IST

11 नवंबर को भारत में “राष्ट्रीय शिक्षा दिवस” के रूप में मनाया जाता है। आज स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्, लेखक, पत्रकार मौलाना अब्दुल कलाम आजाद साहब का 130वां जन्मदिन है। मौलाना अबुल कलाम आजाद स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे और उन्होंने राष्ट्रनीति का मार्गदर्शन किया। शिक्षामंत्री रहते हुए उन्होंने शिक्षा और संस्कृति को विकसित करने के लिए उत्कृष्ट संस्थानों की स्थापना की। मौलाना अबुल कलाम का जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ।

IIT और UGC की स्थापना का श्रेय

आईआईटी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना का श्रेय उन्हीं को जाता है। संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी और ललित कला अकादमी की स्थापना उन्हीं के कार्यकाल में की गई। मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर, 1888 ई. को मक्का में हुआ था। उनका असली नाम अबुल कलाम गुलाम मोहिउद्दीन था। उनके पिता मौलाना खैरुद्दीन ने एक अरब महिला आलिया से शादी की थी। मौलाना आजाद के पूर्वज अफगानिस्तान से आकर बंगाल में बस गए थे।

बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे मौलाना आजाद

मौलाना आजाद बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। उन्होंने उर्दू, हिन्दी, फारसी, बंगाली, अरबी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में महारत हासिल कर ली थी। उन्होंने काहिरा के अल अजहर विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की और कोलकाता में लिसान-उल-सिद' नाम की पत्रिका शुरू की। तेरह से अठारह साल की उम्र के बीच उन्होंने बहुत सी पत्रिकाओं का संपादन किया। मौलाना आजाद ने कई पुस्तकों की रचना और अनुवाद भी किया, जिसमें इंडिया विन्स फ्रीडम और गुबार-ए-खातिर प्रमुख हैं।

RajendraPrasadSardarMaulana-AzadGafarKhan

कई बार जेल भी गए मौलाना आजाद

अंग्रेजी शासन के दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल होकर अंग्रेजी शासन का विरोध किया। उन्होंने अपनी एक साप्ताहिक पत्रिका अल-बलाग में हिन्दू-मुस्लिम एकता पर आधारित भारतीय राष्ट्रवाद और क्रांतिकारी विचारों का प्रचार-प्रसार किया। प्रभावित बंगाल, बिहार, असम और पंजाब राज्यों का दौरा किया और वहां शरणार्थी शिविरों में रसद आपूर्ति और सुरक्षा का बंदोबस्त किया। मौलाना आजाद हिन्दू-मुस्लिम एकता के पक्षधर और भारत विभाजन के घोर विरोधी थे। 22 फरवरी, 1958 को उनका निधन हो गया था।

मौलाना अबुल कलाम आजाद ने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में भी हिस्सा लिया था। वे एक पक्के राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी थे। 1992 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। साथ ही देश में शिक्षा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान स्वरुप उनके जन्म दिवस, 11 नवम्बर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस घोषित किया गया। उनके सम्मान में पूरे देश में अनेकों शिक्षा संस्थानों और संगठनों का नामकरण उनके नाम पर किया गया है।

जीवन परिचय के कुछ खास अंश

- खिलाफत आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

- 1923 में वे भारतीय नेशनल काग्रेंस के सबसे कम उम्र के प्रेसीडेंट बने।

- 1940 और 1945 के बीच काग्रेंस के प्रेसीडेंट रहे।

- आजादी के वाद वे भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के रामपुर जिले से 1952 में सांसद चुने गए और वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने।

- उन्होंने शिक्षा और संस्कृति को विकिसित करने के लिए उत्कृष्ट संस्थानों की स्थापना की।

- संगीत नाटक अकादमी (1953)

- साहित्य अकादमी (1954)

- ललितकला अकादमी (1954)

भारत रत्न लेने से किया था मना

आजाद साहब ने भारत रत्न लेने से मना कर दिया था। बाद में 1992 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया। उनकी जयंती राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रुप में मनाई जाती है। आजाद साहब ने कहा था, मैं उस अखंडता का हिस्सा हूं, जिसे भारतीय राष्ट्रवाद कहा जाता है।

बता दें कि 1931 में नेहरू ने जब जेल में बंद रहने के दौरान 900 पन्नों की बेहद रोचक 'विश्व इतिहास की झलक' किताब लिखी, तो उनके पास तथ्यों और संदर्भों को जांचने के लिए कोई रेफ़रेंस लाइब्रेरी या सामाग्री नहीं थी। लेकिन उनके साथ आज़ाद थे। आज़ाद के पास प्राचीन मिस्र, यूनान और रोम के इतिहास से लेकर चीन की चाय तक की पूरी जानकारी थी।


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सतीश कुमार वर्मा

लेखक न्यूज वर्ल्ड इंडिया में वेब जर्नलिस्ट हैं

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