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सदियों पुराना है अयोध्या से दक्षिण कोरिया का नाता, पढ़ें कोरियाई इतिहास

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 7 , 2018 , 16:35 IST

दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम जुंग सुक अपने चार दिनों के भारत दौरे पर हैं। मंगलवार को वह अयोध्या पहुंचकर उत्तर प्रदेश सरकार के 'दीपोत्सव' समारोह की मुख्य अतिथि बनीं। उनके साथ दक्षिण कोरिया का एक शिष्टमंडल भी यहां पहुंचा। किम जुंग सुक ने यहां जनता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होने पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया साथ ही भारत से अपने अच्छ संबंधों को बनाए रखने की बात कही।

पूरे विश्व में प्रकाश फैलाने वाला पर्व-सूकी

किम जंग सूक ने कहा कि आज आप लोगों के बीच मुझे दिवाली का त्योहार मनाकर काफी खुशी हो रही है। पीएम मोदी का मुझे निमंत्रण देने के लिए शुक्रिया। यूपी के सीएम योगी जी और गणमान्यों को दीपोत्सव की शुभकामनाएं। प्रकाश पर्व अंधेरे पर रोशनी की विजय है। कोरिया में भी मोमबत्ती क्रांति हुई, जिसकी प्रशंसा महात्मा गांधी ने भी की थी। अंधेरा कितना भी हो, हम सब मिलकर इसे दूर कर सकते हैं। मैं कामना करती हूं कि सभी घरों में मां लक्ष्मी का प्रवास हो। भारत और कोरिया की दोस्ती बनी रहे। ये पर्व पूरे विश्व में प्रकाश फैलाने वाला है।

दक्षिण कोरिया से भारत के संबंध सदियों पुराने

सुक का अयोध्या दौरा एक सामान्य यात्रा तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी जड़े गहरी हैं। दक्षिण कोरिया और भारत के संबंध सदियों पुराने हैं। वर्ष 2000-01 में जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, उस समय पता चला कि अयोध्या की एक राजकुमारी दक्षिण कोरिया में रानी बनी थीं और करीब 2000 साल पहले उन्होंने वहां की वंश परंपरा पर राज किया। अयोध्या की इस राजकुमारी का नाम दक्षिण कोरिया में ह्यो ह्वांग-ओक रखा गया। समझा जाता है कि अयोध्या की रानी का असली नाम सूरीरत्ना था। 21वीं सदी के आने पर अयोध्या के साथ दक्षिण कोरिया के संबंधों की चर्चा ने ज्यादा जोर पकड़ी।

किम्हे के मेयर साल 2000 में अपने एक शिष्टमंडल के साथ अयोध्या आए। इस शिष्टमंडल ने दावा किया कि कारक वंश की रानी हू ह्वांग-ओक (जिन्हें ह्यो ह्वांग-ओक) के नाम से भी जाना जाता है, की शादी वहां के शासक किम सूरो से हुई थी। शिष्टमंडल का कहना है कि हू ह्वांग-ओक का जन्म अयोध्या में हुआ था।

सुरीरत्ना का अयोध्या से कोरिया का दौरा

कोरियाई इतिहास बताता है कि 16 साल की उम्र में सुरीरत्ना दक्षिण कोरिया चली गईं। अयोध्या के राजा और सुरीरत्ना ने पिता ने अपनी बेटी को कोरिया भेजा। इसके पीछे उनका एक सपना कारण बताया जाता है। सुरीरत्ना के साथ उनके भाई और तत्कालीन अयोध्या के राजकुमार भी गए। कोरियाई रिसर्चरों के मुताबिक सुरीरत्ना 48 ईसा पूर्व कोरिया पहुची थीं। वहां के तत्कालीन राजा किम-सुरो ने कोरिया पहुंचने पर उनका स्वागत किया दोनों ने शादी की और आगे चलकर कारक वंश की स्थापना की।

राजा किम सुरो सुरीरत्ना को इतना पसंद करते थे कि उनकी याद में पहली बार दोनों जहां मिले थे, वहां मंदिर का निर्माण कराया। सुरीरत्ना का जिक्र अति प्राचीन कोरियाई ग्रंथ सांगयुक युसा में भी मिलता है।

इस ग्रंथ को सांगयुक सकी भी कहते हैं इसका अर्थ है तीन साम्राज्यों की याद का विवरण। सुरीरत्ना याह्वांग-ओक के बारे में कहा जाता है कि वो 189 वर्ष तक जीवित रहीं। उनकी मौत के बाद किम्हे में एक स्मारक बनाया गया। रानी की याद में स्मारक के ठीक सामने एक बड़ा शिलालेख भी लगा है शिलालेख के बारे में कहा जाता है कि उसे सुरीरत्ना अयोध्या से दक्षिण कोरिया ले गई थी।


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