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'मैन ऑफ स्टील' ओपी जिन्दल का सफर हम सबको कामयाबी की राह दिखाता है (जयन्ती विशेष)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 7 , 2018 , 09:30 IST

जीवन है तो संघर्ष चलते रहेंगे पर सच्चाई और ईमानदारी से उनसे लड़ते रहना ही हमारा कर्तव्य है। ये सोच थी देश के महान उद्योगपति, जननेता और मैन ऑफ स्टील कहे जाने वाले ओपी जिन्दल यानि ओम प्रकाश जिन्दल की। ओपी जिन्दल और उनका सफर हमेशा से लोगों के लिए प्रेरणादायी रहा है। मंगलवार को ओपी जिन्दल की जयन्ती है। ओपी जिन्दल का जन्म हरियाणा के हिसार जिले के नलवा गांव में 7 अगस्त 1930 को हुआ था। ओपी जिन्दल के पिता नेतराम जिन्दल एक किसान थे और मां चंद्रावली घरेलू महिला थीं।

ऐसा कहा जाता है कि ओपी जिन्दल का मन मशीनों और तकनीकी कामों में ज्यादा लगता था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा हरियाणा में ही हुई। 22 साल की छोटी सी उम्र में ओपी जिंदल ने व्यापार करना शुरू कर दिया। 1952 में कलकत्ता में ओपी जिन्दल ने स्टील पाइप फैक्ट्री लगाकर अपने बिजनेस की शुरुआत की। फिर 1960 में ओपी जिन्दल ने अपने पैतृक जिले हिसार में जिन्दल स्ट्रीप्स फैक्ट्री की शुरुआत की। किसान से सफल उद्योगपति बनने वाले ओम प्रकाश जिन्दल जिन्हें लोग प्यार से 'बाऊजी' कहते थे कठिन परिश्रम, निष्ठा और सच्चाई के लिए विख्यात थे।

सफल उद्योगपति होने के साथ-साथ 'बाऊजी' सच्चे देशभक्त और समाजसेवी भी थे। उद्योग में अपार सफलता पाने के बावजूद वे साधारण व्यक्तित्व वाले जमीन से जुड़े इंसान थे। उन्होंने समाज के कमजोर, पिछड़े और दलित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई प्रेरणादायक योजनाएं शुरू की। जनसेवा के कामों के लिए उन्होंने कई पहल की और स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास की सुविधाओं के विस्तार में योगदान दिया।

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(फाइल फोटो)

जनसेवा के कामों को आगे बढ़ाने के मकसद से ओपी जिन्दल ने समाज को लाभ देने वाली योजनाओं की शुरुआत की। ओपी जिन्दल ने अपने पिता नेतराम जिन्दल और माता चंद्रावली जिन्दल के नाम से एनसी जिन्दल चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की। इस ट्रस्ट के तहत हरियाणा के हिसार में 500 बेड वाला अस्पताल चलाया जा रहा है। जहां गरीबों का मुफ्त इलाज किया जाता है। हिसार में ही विद्या देवी जिन्दल नाम से एक रेजिडेंशियल स्कूल भी है। 40 एकड़ में लड़कियों के लिए बने इस स्कूल में 12वीं कक्षा तक की शिक्षा दी जाती है।

ये उनका देशप्रेम और समाज सेवा का ही जज़्बा था जिसके चलते वो राजनीति में आए और अपने राज्य और देश को आगे बढ़ाने के काम में जुट गए। 1991 में पहली बार वे विधायक चुने गए। 1996 में हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर कुरुक्षेत्र से लोकसभा का चुनाव जीता। जिसके बाद केंद्र में अटल बिहारी वाजपयी के नेतृत्व में बनने वाली गठबंधन सरकार को अपना समर्थन देकर महत्वपूर्ण योगदान दिया। 2005 में तीसरी बार हिसार से विधायक के लिए खड़े हुए और बड़ी जीत हासिल की और प्रदेश में ऊर्जा मंत्री की जिम्मेदारी निभाई। बतौर ऊर्जा मंत्री उनका सपना था कि हरियाणा और पूरे देश में बिजली पानी की तरह बहें।

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(फाइल फोटो)

राजनीति में ओपी जिन्दल की छवि पाक साफ जननेता की रही। राजनीति और जनसेवा करते हुए वे लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे, लेकिन 31 मार्च 2005 को एक हेलिकॉप्टर हादसे में वो इस दुनिया से रूखसत हो गए।

उनके जाने के बाद उनकी औद्योगिक विरासत को आगे बढ़ाया उनकी पत्नी सावित्री जिन्दल और चार बेटों ने। उनके चारों बेटे पृथ्वीराज जिन्दल, सज्जन जिन्दल, रतन जिन्दल और नवीन जिन्दल उनके खड़े किए गए बिजनेस अंपायर को बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं।

ओपी जिंदल उद्योग समूह का मुख्य व्यवसाय स्टील से संबंधित रहा है, फिर भी उसे 5 वर्गों-पाइप्स, कार्बन स्टील,स्टेनलेस स्टील, रेल और ऊर्जा में बांटा जा सकता है। अपने पिता ओपी जिन्दल के नक्शे कदम पर चलते हुए सभी बेटों ने अपने पिता की विरासत को संभाल रखा है। आज उद्योग जगत में ओपी जिन्दल के चारों बेटों का नाम देश के बड़े उद्योगपतियों में शुमार है। सभी देश के औद्योगिक और सामाजिक विकास में बढ़चढ कर अपना-अपना योगदान दे रहे हैं।

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(अपने चारों बेटे के साथ ओपी जिन्दल- फोइल फोटो)

ओपी जिन्दल ग्रुप देश के अग्रणी कारोबारी घरानों में शामिल है। ओपी जिन्दल के सपने को साकार करने में उनका परिवार पूरी शिद्दत से जुटा है और यही वजह है कि संसार से रुखसत होने के बाद भी ओपी जिंदल अपने कार्यों की वजह से हम सब के बीच आज भी अपने विचारों की वजह से जीवित है।

कुछ लोग जन्म से ही महान पैदा होते हैं, और कुछ लोग अपनी मेहनत के बलबूते पर अपने कर्म की बदौलत महान बनते हैं। ऐसे लोग भावी पीढ़ी के लिए छोड़ जाते हैं, एक आदर्श की छाप जिसे अपनाकर दूसरे लोग भी अपने जीवन में असीम सफलता हासिल करते हैं। कुछ ऐसे ही थे सबके प्रिय ओम प्रकाश जिन्दल।

 

 

 


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