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जिस लेनिन पर बुलडोजर चलाने से देश में बवाल मचा है वो लेनिन कौन हैं? जानिये

अमितेष युवराज सिंह | न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 6 , 2018 , 17:14 IST

उत्तर-पूर्व में बीजेपी को मिली धमाकेदार जीत के बाद त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने पर राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। लेनिन की मूर्ति को बुलडोजर चलाकर नेस्तनाबूद कर दिया गया। त्रिपुरा में कई जगह पर सीपीएम समर्थकों और बीजेपी समर्थकों में झड़पें भी हुई हैं। जिस लेनिन को लेकर राजनीतिक हंगामा बरपा हुआ है वो लेनिन कौन हैं।

कौन थे व्लादिमीर लेनिन

लेनिन का पूरा नाम व्लादिमीर इलीइच लेनिन था और उन्हें रूसी क्रांति का नायक कहा जाता है। लेनिन बोल्शेविक क्रांति के नेता एवं साम्यवादी शासन के संस्थापक थे। उनका जन्म रूस के सिंविर्स्क नामक स्थान में हुआ था और उनका असली नाम उल्यानोव था। वो शुरू से ही क्रांतिकारी के रूप में जाने जाते थे। 1887 में कज़ान विश्वविद्यालय के विधि विभाग में प्रवेश लिया था लेकिन छात्रों के क्रांतिकारी प्रदर्शन में हिस्सा लेने के कारण उन्हें विश्वविद्यालय ने निष्कासित कर दिया गया।

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(लेनिन की फाइल तस्वीर)

साल 1889 में उन्होंने स्थानीय मार्क्सवादियों का संगठन बनाया था और उसके बाद वो  मार्क्सवादियों के एक बड़े नेता के रूप में उभरे, जिसके चलते उन्हें रूसी क्रांति के दौरान जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने रूसी क्रांति पर 30 से ज्यादा किताबें लिखी हैं। मार्क्सवादी विचारक लेनिन के नेतृत्व में 1917 में रूस की क्रांति हुई थी। लेनिन की अध्यक्षता में सरकार की स्थापना की गई थी।

सरकार बनने के बाद जमींदारों से भूमि छीनकर सारी भूसंपत्ति पर राष्ट्र का स्वामित्व स्थापित कर दिया गया। व्यवसायों और कारखानों पर श्रमिकों का नियंत्रण हो गया और बैकों तथा परिवहन साधनों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। जिससे श्रमिकों और किसानों को पूंजीपतियों और जमींदारों से छुटकारा मिला और समस्त देश के निवासियों में पूर्ण समता स्थापित कर दी गई।

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(लेनिन की फाइल तस्वीर)

लेनिनवाद क्या है?

लेनिन ने कहा था कि मजदूर भी एक इंसान होते हैं और उन्हें भी सम्मान के साथ जीने का हक है। रूसी कम्युनिस्ट पार्टी (बोल्शेविक पार्टी) के संस्थापक लेनिन के मार्क्सवादी विचारों को लेनिनवाद के नाम से जाना जाता है। ये रूसी क्रांति थी, जिसने रूस का भविष्य बदल दिया। लेनिन ने कहा था कि हमारी समस्त नीति और प्रचार का लक्ष्य यह होना चाहिए कि चाहे कुछ भी हो जाए, हमारे देशवासियों को युद्ध की आग में न झोंका जाए। लेनिन को इतिहास के सबसे महान क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है। 54 साल की उम्र में स्ट्रोक की वजह से 1924 में उनका निधन हो गया।


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