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बैंकों को 3695 करोड़ की चपत लगाने वाले विक्रम कोठारी कौन हैं

अमितेष युवराज सिंह | न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 19 , 2018 , 17:56 IST

किंग ऑफ पेन के नाम से मशहूर रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी पर नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की तरह बैंकों को कई हजार करोड़ का चूना लगाने का आरोप लगा है। इसी सिलसिले में सीबीआई लखनऊ और ईडी की संयुक्त टीम ने सोमवार सुबह करीब 9 बजे कानपुर के तिलकनगर स्थित विक्रम कोठारी के आवास पर पहुंची। पांच सदस्यीय टीम ने कोठारी परिवार के सभी सदस्यों के पासपोर्ट और मोबाइल कब्जे में ले लिए हैं। उनके लैपटॉप, आईफोन और आईपैड भी की जांच चल रही है।

बैंकों का 3695 करोड़ है बकाया

बैंक ऑफ बड़ोदा की शिकायत पर सीबीआई ने रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमेटेड, उसके डायरेक्टर्स विक्रम कोठारी, साधना कोठारी और राहुल कोठारी और अज्ञात बैंक अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। ईडी ने भी PMLA के तहत मामला दर्ज किया है। रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमेटेड पर ब्याज समेत कुल 3695 रुपये का बकाया है। रोटोमैक के मालिकों ने बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज़ बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का कर्ज है।

Vikram-kothari

विक्रम कोठारी का पूरा मामला

रोटोमैक कंपनी को 5 बैंकों इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक ने लोन दिया था। इन बैंकों ने शर्तों से समझौता कर लोन पास किया था। विक्रम कोठारी पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया मुंबई शाखा की 485 करोड़, इलाहाबाद बैंक कोलकाता शाखा की 352 करोड़, बीओबी की 600 करोड़, बीओआई (लीड बैंक) की 1365 करोड़ और आईओबी की 1000 करोड़ रुपये की बकाएदारी है।

बैंकों का आरोप है कि विक्रम कोठारी ने कथित तौर पर न लोन की रकम लौटाई और न ही ब्याज दिया। इसपर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दिशा निर्देशों पर एक ऑथराइज्ड जांच कमेटी गठित की गई। कमेटी ने 27 फरवरी 2017 को रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लि. को विलफुल डिफॉल्टर (जानबूझकर कर्ज नहीं चुकानेवाला) घोषित कर दिया। कमेटी ने लीड बैंक की पहल पर यह आदेश पारित किया था।

कौन हैं विक्रम कोठारी

कानपुर के रहने वाले विक्रम कोठारी पारंपरिक रूप से एक कारोबारी परिवार से रिश्ता रखते हैं। कानपुर पुराना व्यावसायिक शहर है और उनके पिता मनसुख कोठारी ने 1973 में पान पराग ब्रांड की शुरुआत की थी। विक्रम कोठारी ने 1980 के दशक में कोठारी नाम से अपने स्टेशनरी बिजनेस की शुरूआत की जो 1992 में एक ब्रांड बन गया। उनके भाई दीपक कोठारी मशहूर पान मसाला पान पराग के मालिक हैं। पहले इन दोनों भाइयों का साझेदारी में पिता का कारोबार था और 1990 के दशक में दोनों भाइयों के बीच कारोबार का बंटवारा हुआ। विक्रम कोठारी को रोटोमेक का मालिकाना हक मिला और उसके भाई दीपक कोठारी को पान मसाला का कारोबार मिला। 


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