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बेटी बचाने पर भाषण बहुत हुआ, आइए कुछ नया करें.....

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| जनवरी 24 , 2018 , 17:22 IST

आज राष्ट्रीय बालिका दिवस है और ऐसे में हम आपसे बात करेंगे कि आखिर क्यों भारत में लोग संतान के रूप में बेटी की बजाय पहले बेटा चाहते हैं? जैसा की हर कोई जानता है कि लड़के हों या लड़कियां दोनों हर क्षेत्र में तरक्की कर रहे लेकिन हमारे देश में ऐसे भी लोग हैं जिन्हें बेटी नहीं चाहिए। इसके पीछे एक नहीं कई कारण हैं। 

लड़कियों की 'सुरक्षा' को देखते हुए आज के समय में हर कोई चाहता है कि उनको लड़का ही हो। इसमें कोई दो राय नहीं है कि आज हमारे देश में माता-पिता अपनी बेटी की शादी से ज्यादा उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। अगर बेटी घर से बाहर निकली है तो हर माँ-बाप को डर अन्दर ही अन्दर खाए जाता है।

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हमारे इस गंदे समाज में ऐसे कई भेड़िये हैं जो हर वक्त लड़कियों को अपना शिकार बनाने की फ़िराक में ही घूमते हैं। सरकार और प्रशासन की इतनी चौकसी होने के बावजूद भी प्रतिदिन बलात्कार, शारीरिक उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न के मामले होते ही रहते हैं और यह आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही चला जा रहा हैं। इन्हीं दरिंदो की तुक्छ कर्मो की वजह से मां कहीं ना कहीं 'बेटी' को जन्म देने से डरती है। 

''ऐसे में एक सवाल ये भी उठना वाजिब है कि जब लड़कियों को सिक्योरिटी नहीं दे सकते तो किस बात का राष्ट्रीय बालिका दिवस''

साल 2017 में प्लान इंडिया की तरफ से जेंडर वल्नरेबिलिटी इंडेक्स की रिपोर्ट पेश की गई थी। इसमें भारत के सभी राज्यों को शामिल करते हुए लिस्ट जारी की गई थी। इस लिस्ट में गोवा एक नंबर पर था, बता दें गोवा के बाद क्रमशः केरल, सिक्किम, मिजोरम और मणिपुर जैसे स्टेट महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित राज्य माने गए हैं।

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आपको जानकर हैरानी होगी कि देश की राजधानी को महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित बताया गया। जबकि बिहार की स्तिथि सबसे ज्यादा खराब बताई गयी थी। बता दें अभी हाल में ही हरियाणा में 48 घंटे में 7 बलात्कार के मामले सामने आएं हैं।

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ऐसे में एक सवाल हमेशा ही जहन में चलता रहता है कि क्या आज जब हम नेशनल गर्ल्स डे मना रहे हैं तो क्या हमारे देश में लड़कियां सुरक्षित हैं या नहीं ? आजादी के  इतने साल बाद भी अगर हम अपने देश के बेटियों को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं तो किस बात का नेशनल गर्ल्स डे।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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