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इसरो की एक और कामयाबी, 400 टन रॉकेट वाले क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 19 , 2017 , 21:23 IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो हर दिन नई कहानी गढ़ रहा है। इसरो ने एक बार फिर बड़ी कामयाबी हासिल की है। इस बार इसरो ने स्वदेश में निर्मित सबसे बड़े क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया है।

इस शक्तिशाली इंजन का परीक्षण तमिलनाडु के तिरनेल्वेल्ली जिले के महेंद्रगिरी स्थित ISRO प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में किया गया। परीक्षण से पहले सभी प्रणालियों की पुष्टि करने के लिए सी 25 स्टेज ने 25 जनवरी 2017 को 50 सेकेंड के लिए सफल उड़ान भरी थी।

जीएसएलवी टेक्नोलॉजी में इसरो को मिली अहम सफलता

इसरो से मिली जानकारी के मुताबिक स्टेज विकास के पहले 3 सीई 20 इंजन छोड़े गए थे, जिनमें से दो इंजनों का समुद्र तल में परीक्षण किया गया और तीसरे इंजन को काफी उंचाई में 25 सेकेंड के लिए उड़ाया गया।

इसरो के वैज्ञानिक इस परीक्षण को काफी अहम माने रहे हैं। ऐसा इसलिए कि इस इंजन से जीएसएलवी मार्क तृतीय 400 टन श्रेणी के रॉकेट को अंतरिक्ष में छोड़ने में सफलता मिल सकती है। देश के वैज्ञानिकों ने मार्क तृतीय को 2 दशक के अथक प्रयासों के बाद बनाया है।

Isro 789

बड़े क्रायोजेनिक इंजन की विशेषताएं

इस इंजन में ईंधन के तौर पर लिक्विड हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही ईंधन को माइनस 253 डिग्री सेंटीग्रेड में रखा जाता है।

Isro 1

15 फरवरी को इसरो ने रचा था इतिहास

दरअसल 15 फरवरी को इसरो ने एक साथ 104 सैटेलाइट को सफलता पूर्वक लांच कर दुनिया को भौंचक कर दिया था। ऐसा कारनामा करने वाला भारत दुनिया का एकलौता देश है। इसरो की इस कामयाबी की दुनियाभर में तारीफ हुई थी। यहां तक की चीन ने भी भारत की सफलता को शानदार बताया था।

इसरो की कामयाबी से जहां अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत का दबदबा बढ़ेगा। वहीं भारत भविष्य में बड़े-बड़े स्वदेशी और विदेशी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में सफल परीक्षण कर सकेगा।

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