मनोरंजन

रफी साहब, एक ऐसे फनकार जिन्हें सुनकर मन बोले वाह! 5 सुपरहिट गाने

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1485
| दिसंबर 24 , 2017 , 15:04 IST

आज आवाज के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी का जन्मदिन है। इस खास मौके पर गूगल ने रफी साहब पर डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। गूगल ने उनकी एक तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर में रफी साहब गाना रिकॉर्ड करते हुए नजर आ रहे हैं।

Jai hind

मोहम्मद रफी का निक नेम 'फीको' था और बचपन से ही राह चलते फकीरों को सुनते हुए रफी साहब ने गाना शुरू कर दिया था। एक वक्त के बाद रफी साहब के पिता अपने परिवार के साथ लाहौर चले गए थे। मोहम्मद रफी ने उस्ताद अब्दुल वाहिद खान, पंडित जीवन लाल मट्टू और फिरोज निजामी से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली थी।

मोहम्मद रफी (जन्‍म: 24 दिसंबर 1924-निधन:31 जुलाई 1980) के गानों को न जाने कितनी पीढ़ियों ने गुनगुनाया है। अपनी गायकी से सबके दिलों पर राज़ करने वाले मोहम्मद रफी साहब की आज जयंती है। इन्हें शहंशाह-ए-तरन्नुम भी कहा जाता था। मोहम्मद रफी की आवाज़ ने उनके बाद सोनू निगम, मुहम्मद अज़ीज़ जैसे कई गायकों को प्रेरित किया। मोहम्‍मद रफी पंजाब के कोटला सुल्‍तान सिंह गांव में जन्में थे और वहां से मुंबई ही नहीं दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने वाले इस महान शख्सियत के जन्मदिवस पर आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें।

श्रेष्‍ठ पार्श्‍वगायक स्‍व. मोहम्‍मद रफ़ी का 24 दिसंबर रविवार को 93 वां जन्‍मदिन है। हिंदी फिल्‍मों के अलावा उन्‍होंने गैर फिल्‍मी गीत, भजन, नातें सहित आंचलिक गीत भी गाए।

अपने 35 वर्ष के करियर में उन्‍होंने तकरीबन 26 हजार गीत रिकार्ड किए। निश्चित ही इन गीतों में हिंदी गीतों का सबसे बड़ा हिस्‍सा है। रफ़ी साहब के हिंदी गीतों की बेमिसाल गायकी पर मुग्‍ध होने वालों की बेशक कोई कमी नहीं है।

आइए जानते हैं रफी साहब के बारे में कुछ अनोखी बातें-:

1. मात्र 13 साल की उम्र में मोहम्मद रफी ने लाहौर में उस जमाने के मशहूर अभिनेता 'के एल सहगल' के गानों को गाकर पब्लिक परफॉर्मेंस दी थी।

2. रफी साहब ने सबसे पहले लाहौर में पंजाबी फिल्म 'गुल बलोच' के लिए 'सोनिये नी, हीरिये नी' गाना गाया था।

3. मोहम्मद रफी ने मुंबई आकर साल 1944 में पहली बार हिंदी फिल्म 'गांव की गोरी' के लिए गीत गाया था।

4.मोहम्मद रफी ने उस्ताद अब्दुल वाहिद खान, पंडित जीवन लाल मट्टू और फिरोज निजामी से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली थी।

5. मोहम्मद रफी को सब दयालु सिंगर कह कर पुकारते थे, क्योंकि वो गाने के लिए कभी भी फीस का जिक्र नहीं करते थे और कभी कभी तो 1 रुपये में भी गीत गए दिया करते थे।

6. मोहम्मद रफी ने सबसे ज्यादा डुएट गाने 'आशा भोसले' के साथ गाए हैं। रफी साब ने सिंगर किशोर कुमार के लिए भी उनकी दो फिल्मों 'बड़े सरकार' और 'रागिनी' में आवाज दी थी।

7. मोहम्मद रफी को 'क्या हुआ तेरा वाद' गाने के लिए 'नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया था। 1967 में उन्हें भारत सरकार की तरफ से 'पद्मश्री' अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।
8. मोहम्मद रफी को दिल का दौरा पड़ने की वजह से 31 जुलाई 1980 को देहांत हो गया था।

आइए आपको मोहम्मद रफी के कुछ चुनिंदा गानों से रूबरू करवाते हैं, जिन्हें चाहे कितनी बार भी सुन लीजिए, दिल नहीं भरेगा -:

 1)- लिखे जो खत तुझे

शशि कपूर और आशा पारिख पर फिल्माए गए फिल्म 'कन्यादान' के इस रोमांटिक गाने को रफी की सदाबहार आवाज ने और भी ज्यादा दिलकश बना दिया।

2)- मैंने पूछा चांद से कि देखा है कहीं

फिल्म 'अब्दुल्ला' में मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे इस गाने को मोहम्मद रफी ने इतनी खूबसूरती से गाया, कि आज भी इसे बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन रोमांटिक गानों में शुमार किया जाता है।

 3)- क्या हुआ तेरा वादा

'सैड रोमांटिक सॉन्ग' की श्रेणी में बेहद खूबसूरती से गाये गए इस गाने को आज भी लोग उतना ही पसंद करते हैं, जितना 1977 में रिलीज हुई इस फिल्म 'हम किसी से कम नहीं' के दौर में लोग पसंद करते थे। आर.डी. बर्मन के संगीत में रफी की आवाज ने तो कमाल ही कर दिया था।

4)- कर चले हम फिदा

देशभक्ति की भावनाओं से सराबोर कर देने वाले फिल्म 'हकीकत' के इस बेमिसाल गाने को सुनकर आज भी कई लोगों की आंखों में आंसू आ जाते है। जंग में सैनिकों के बलिदान की कहानी को रफी ने इस गाने में इतनी बारीकी से देशभक्ति के जज्बातों में ढाला, जिसका कोई सानी नहीं है।

 5)- ये  दुनिया ये महफिल

कैफ़ी आजमी के लिखे, फिल्म 'हीर-रांझा' का ये दर्द भरा गाना आज भी लोगों को लुभाता है। 'सैड सॉन्ग' की श्रेणी में इस गाने का कोई जवाब नहीं।

 


कमेंट करें