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सनी लियोन के डांडिया कंडोम एड से गुजरात में बवाल, मंत्री से प्रतिबंध लगाने की मांग

icon कुलदीप सिंह | 0
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| सितंबर 22 , 2017 , 13:54 IST

आपको ये सुनने में भले अजीब लगे लेकिन ये सच है कि पिछले कुछ सालों से नवरात्रि के त्योहार के दौरान कंडोम और दूसरे सेक्स उत्पादों की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। ये चलन गुजरात में सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। गुजरात में कंडोम की मांग को देखते हुए कंडोम बेचने वाली कंपनियां विज्ञापन भी करने लगी हैं, ऐसे ही एक विज्ञापन को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।

दरअसल गुजरात के कुछ शहरों में सनी लियोन के डांडिया विज्ञापन ने सनसनी फैला दी है। सनी मैनफोर्स कंपनी के कंडोम का प्रचार करती हैं, इसके एक हालिया विज्ञापन को डांडिया थीम पर डिजाइन किया गया है जिसकी खासी आलोचना हो रही है।

इस विज्ञापन में कहा गया है 'खेलो मगर प्यार से'....

कच्छ के युवा किसान  प्रदीप पटेल को लगता है कि यहां "खेलना" द्विअर्थी शब्द के रूप में प्रयुक्त हुआ है। उनके अनुसार डांडिया खेलने की आड़ में कंडोम का प्रचार किया गया है। कुछ संगठनों ने इन होर्डिंग्स को हटाने की मांग सरकार से की है।

कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने उपभोक्ता संरक्षण मामलों के मंत्री रामविलास पासवान को लिखे एक शिकायती पत्र में कहा है कि यह बिक्री को बढ़ाने का गैर जिम्मेदाराना और अपरिपक्व तरीका है, जिसमें हमारी संस्कृति और मूल्यों को दांव पर लगा दिया गया है। कंफेडरेशन ने इस विज्ञापन के निर्माता और सनी लियोनी पर कार्रवाई के साथ ही इस पर तत्काल प्रतिबन्ध की भी मांग की है।

गुजरात में पिछले कुछ सालों से नवरात्र के दौरान कंडोम की बिक्री बढ़ जाती है। सेक्स से जुड़े सामानों को ऑनलाइन बेचने वाली कंपनी "दैट्स पर्सनल डॉट कॉम" के विमेश कुमार कहते हैं,

"नवरात्र के दौरान कंडोम और लुब्रिकेंट्स की बिक्री में 150 से 200 प्रतिशत की उछाल आ जाती है"

पिछले दो साल के आंकड़ों के आधार पर उनका कहना है कि सूरत, अहमदाबाद और वडोदरा से मांग ज्यादा आती है. विमेश के अनुसार, कंडोम के आलावा रोमांस प्रोडक्ट की बिक्री में भी वृद्धि होती है। राजकोट, जामनगर, आणंद, गांधीनगर और वापी जैसे शहरों में भी मांग बढती है लेकिन ज्यादा नहीं।

 थीम के कंडोम विज्ञापन से गुजरात में बवाल

जागरूकता से समाधान मुमकिन है

नवरात्र के बाद गर्भपात के मामले बढ़ने संबंधी रिपोर्टों पर सवाल खड़ा करते हुए समाजशास्त्री और गुजरात यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डॉ जे सी पटेल कहते हैं कि इस बारे में कोई प्रमाणिक आंकड़ा नहीं है, फिर भी असुरक्षित गर्भपात को लेकर जागरूकता बढ़ाये जाने की जरूरत से वे इनकार नहीं करते। अतीत में, यूनिसेफ नवरात्र के दौरान एड्स के प्रति जागरूकता और असुरक्षित सेक्स के खिलाफ अभियान चला चुका है।

वैसे, गर्भ नियोजन के साधनों की कमी और अज्ञानता के चलते देश में हर साल लाखों मौत होती हैं। विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए मुंबई के भारतीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान में शोधार्थी अम्बरीश राय कहते हैं कि अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए प्रतिवर्ष गर्भपात कराने वाली डेढ़ करोड़ महिलाओं में से करीब 20 लाख महिलाओं की मौत हो जाती है। अम्बरीश का मानना है, 'जागरूकता के जरिये ऐसी अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है'


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कुलदीप सिंह

Executive Editor - News World India. Follow me on twitter - @KuldeepSingBais

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