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अयोध्या विवाद: SC ने मध्यस्थता पर फैसला रखा सुरक्षित, हिंदू महासभा ने फैसले का किया विरोध

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 6 , 2019 , 13:54 IST

अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में मध्यस्थता हो या नहीं इसपर करीब एक घंटे तक सुनवाई हुई और इसपर फैसला सुरक्षित रख लिया गया। हिन्दू महासभा मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है। उसका कहना है कि बिना सभी पक्षों की बात सुने मध्यस्थता का आदेश नहीं दिया जा सकता है। मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के लिए तैयार है।

पांच जजों की संविधान पीठ ने बुधवार को अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजने के फैसले को सुरक्षित रख लिया। हालांकि उत्तर प्रदेश राज्य सहित हिंदू पक्षकारों ने अदालत के प्रस्ताव का विरोध किया है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इस मामले पर आदेश सुरक्षित रख लिया। उत्तर प्रदेश की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "यह (मध्यस्थता) उचित और विवेकपूर्ण नहीं होगा।"

राम लला की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील सी.एस.वैद्यनाथन ने मध्यस्थता का विरोध किया और अदालत से कहा कि भगवान राम की जन्मभूमि विश्वास व मान्यता का विषय है और वे मध्यस्थता में विरोधी विचार को आगे नहीं बढ़ा सकते।

वहीं हिंदू महासभा की दलील पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बोबडे ने कहा कि जब वैवाहिक विवाद में कोर्ट मध्यस्थता के लिए कहता है तो किसी नतीजे की नहीं सोचता बस विकल्प आजमाना चाहता है। हम ये नहीं सोच रहे कि कोई किसी चीज का त्याग करेगा। हम जानते हैं कि ये आस्था का मसला है, हम इसके असर के बारे में जानते हैं।

इसके साथ ही बोबडे ने कहा कि हम हैरान हैं कि विकल्प आज़माए बिना मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है? कोर्ट ने कहा अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है पर हम बेहतर भविष्य की कोशिश जरूर कर सकते हैं।

जस्टिस बोबडे ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर मध्यस्थता पर कुछ तय होता है तो मामले को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ये मामला किसी पार्टी का नहीं बल्कि दो समुदाय के बीच का विवाद का है, इसलिए मामले को सिर्फ जमीन से नहीं जोड़ा जा सकता है।


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