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भीमा कोरेगांव: SIT जांच की याचिका खारिज, 4 हफ्ते और बढ़ी एक्टिविस्ट्स की नजरबंदी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 28 , 2018 , 13:09 IST

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पांच एक्टिविस्ट्स की गिरफ्तारी में दखल देने से इनकार कर दिया। पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में एसआईटी की जांच की मांग करने वाली इतिहासकार रोमिला थापर सहित चार कार्यकर्ताओं की याचिका पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की एसआईटी जांच की मांग ठुकरा दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पांचों कार्यकर्ताओं की नजरबंदी को चार हफ्तों के लिए बढ़ा दिया ।

SIT जांच की मांग खारिज

वहीं कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में आरोपी बनान गए कार्यकर्ता नजरबंदी के दौरान भी राहत के लिए कोर्ट जा सकते हैं। हालांकि कोर्ट ने इस केस में एसआईटी जांच की मांग को खारिज कर दिया है और पुणे पुलिस को अपनी जांच जारी रखने को कहा है।

वकीलों का तर्क

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, आनंद ग्रोवर और वृंदा ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट से दखल देने और SIT जांच कराने का आग्रह किया तो महाराष्ट्र सरकार की ओर से ASG तुषार मेहता और शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने इसका विरोध किया। ASG तुषार मेहता ने बरामद चिट्ठियां व दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि इनसे साफ है कि वे एक साजिश का हिस्सा हैं। वहीं हरीश साल्वे ने कहा कि इस मामले में SIT जांच की जरूरत नहीं है। ऐसा आदेश 2G जैसे मामलों में दिया जाता है।

इसके पहले अदालत ने आरोपियों को अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। फिलहाल ये सभी कार्यकर्ता हाउस अरेस्ट में रह रहे हैं।

गौरतलब है कि इस साल जनवरी में हुई भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पुणे पुलिस ने बीते 28 अगस्त को देशभर के कई शहरों में एक साथ छापेमारी कर सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव को हैदराबाद से, फरीदाबाद से सुधा भारद्वाज और दिल्ली से गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया था। वहीं ठाणे से अरुण फरेरा और गोवा से वर्नान गोनसालविस को गिरफ्तार किया गया।इस दौरान उनके घर से लैपटॉप, पेन ड्राइव और कई कागजात भी जब्त किए गए।


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