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केंद्र को मिली राहत, SC ने कहा- डील की कीमतों का अभी खुलासा करने की जरूरत नहीं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 14 , 2018 , 13:52 IST

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल एयरक्राफ्ट सौदे पर केंद्र सरकार को कुछ राहत दी है। शीर्ष अदालत ने कहा- जब तक हम तय नहीं करते तब तक सरकार को इस विमान की कीमत पर याचिकाकर्ताओं के विवादों का जवाब देने की जरूरत नहीं है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने अपनी दलील में कहा- राफेल डील में बदलाव किया गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते थे कि इसे अंबानी की कंपनी को दिया जाए। कोर्ट आज तय कर सकता है कि इस मामले की जांच हो या नहीं।

याचिकाकर्ता के वकील एमएल शर्मा ने कोर्ट से कहा कि सरकार की ओर से अदालत में पेश की गई रिपोर्ट से खुलासा होता है कि यह एक गंभीर घोटाला है। उन्होंने यह केस पांच जजों की बेंच के पास ट्रांसफर करने की अपील की।

तीन जजों की बेंच कर रही सुनवाई

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट और याचिकाकर्ताओं को 36 राफेल विमानों की खरीद के संबंध में किए गए फैसले के ब्योरे वाले दस्तावेज सौंपे थे। राफेल की कीमत को लेकर एक अलग सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा गया था।

प्रशांत भूषण की दलीलें

126 लड़ाकू विमानों को 36 जेट विमानों के साथ बदल दिया गया ताकि सौदा पूरा हो जाए। सरकार की तरफ से एक फर्जी तर्क दिया गया। तीन साल से अधिक समय हो गया अभी तक कोई जेट नहीं आया।
सरकार कह रही है कि ऑफसेट पार्टनर चुनने में सरकार की कोई भूमिका नहीं है जबकि नियम के मुताबिक ऑफसेट पार्टनर के लिए रक्षा मंत्री के दस्तखत जरूरी होते हैं। यह अपने आप में विरोधाभासी है।
सरकार की दलील है कि राफेल की कीमत सार्वजनिक होने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। सरकार संसद में दो मौकों पर खुद इसकी कीमत बता चुकी है ऐसे में यह कहना कि कीमत बताने से गोपनीयता की शर्तों का उल्लंघन होगा, गलत दलील है।
राफेल डील में ऑफसेट पार्टनर के रूप में रिलायंस का चुनाव एक कमीशन है। यह मेरा आरोप है और मैंने इसे प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज जमा कर दिए हैं। इस मामले में सीबीआई जांच होनी चाहिए।
डीपीपी संशोधन भी साबित करता है। इस समझौते में रिलायंस के पक्ष में संशोधन किया गया।

अरुण शौरी की दलीलें

सवाल यह है कि कैसे शून्य अनुभव वाली एक कंपनी (रिलायंस डिफेंस) को पहले शामिल किया जा सकता है और इस तरह के एक बड़े सौदे की ऑफसेट दी जा सकती है।
दैसो एक गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही थी। इस तंत्र ने उसकी मदद की। यही कारण है कि वे जो कुछ भी कह रहे हैं उन्हें न्यायसंगत बना रहे हैं। अतीत और वर्तमान के अपने बयान की तुलना करें।
उस समय रक्षा मंत्री रहे मनोहर पर्रिकर ने घोषणा की थी कि राफेल सौदा प्रधानमंत्री मोदी का निर्णय है और मैं इसका समर्थन करता हूं। इससे पता चला है कि रक्षा मंत्रालय लूप में था।

 


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