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आधार की संवैधानिक वैधता बरकरार, SC ने कहा- इससे गरीबों को ताकत मिली है

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 26 , 2018 , 12:11 IST

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता पर बड़ा फैसला देते हुए इसे बरकरार रखा है। कोर्ट ने सीधे तौर पर कहा कि मोबाइल और निजी कंपनियां आधार कार्ड की डिमांड नहीं कर सकती हैं।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई में 5 जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए आयकर रिटर्न और पैन कार्ड के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य किया। वहीं स्कूल में दाखिले और CBSE, UGC, NEET में आधार को जरूरी नहीं किया गया।

गरीबों को मिली ताकत: जस्टिस सीकरी 

कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड की ड्यूप्लिकेसी संभव नहीं है और इससे गरीबों को ताकत मिली है। और उन्हें अलग पहचान मिली है। फैसले में जजों ने कहा कि आधार का अर्थ अनूठा है, शिक्षा हमें अंगूठे से दस्तखत पर लाती है और तकनीक हमें अंगूठे के निशान पर ले जा रही है।कोर्ट ने कहा कि आधार दूसरे आईडी प्रूफ्स से काफी अलग है क्योंकि इसकी डुप्लीकेसी नहीं की जा सकती है।' फैसले में यह भी कहा गया कि मानक तय करना जरूरी है और लोगों की गरिमा भी महत्वपूर्ण है। 

कोर्ट ने यह भी कहा है कि सरकार बायॉमीट्रिक डेटा को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कोर्ट की इजाजत के बिना किसी और एजेंसी से शेयर नहीं करेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार को यह भी सुनिश्चत करना चाहिए कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिल सके।

जस्टिस सीकरी ने केंद्र से कहा है कि वह जल्द से जल्द मजबूत डेटा सुरक्षा कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'किसी भी व्यक्ति को दिया जानेवाला आधार नंबर यूनीक होता है और किसी दूसरे को नहीं दिया जा सकता है। आधार इनरोलमेंट के लिए UIDAI द्वारा नागरिकों का न्यूनतम जनसांख्यिकीय और बायॉमीट्रिक डेटा लिया जाता है। गौरतलब है कि 17 जनवरी को शुरू हुई आधार मामले पर सुनवाई 38 दिनों तक चली। 


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