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सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी कहानी: कैसे जांबाजों ने सीमा लांघ कर आतंकियों पर बरपाया था कहर

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 9 , 2017 , 14:45 IST

पिछले साल 29 सितंबर को भारतीय सेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल के दूसरी ओर जाकर आतंकियों के लांच पैड को ध्वस्त करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। हर भारतीय के मन में यह सवाल उठ रहा था कि भारतीय सेना ने कैसे इस सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। उन्होंने जान की परवाह किए बगैर कैसे आतंकियों को खात्मा किया होगा।

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इस सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने में पैरा कमांडोज और पैराट्रूपर्स से लैस टीम का अहम योगदान था जिन्हें इस साल 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस ऑपरेशन की प्लानिंग और उसे अंजाम तक पहुंचाने में बहुत सारे लोगों का हाथ है। जंग के मैदान में उतरकर दुश्मनों पर मौत बनकर बरसे इन जवानों को मेडल्स क्यों मिले, यह बताने के लिए सरकार ने इस ऑपरेशन की जानकारी साझा की है।

कौन-कौन थे ऑपरेशन सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल

सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने में 19 पैरा कमांडोज का अहम योगदान है। पैरा रेजिमेंट के 4th और 9th बटैलियन के एक कर्नल, पांच मेजर, दो कैप्टन, एक सूबेदार, दो नायब सूबेदार, तीन हवलदार, एक लांस नायक और चार पैराट्रूपर्स ने सर्जिकल स्ट्राइक को अपने अंजाम तक पहुंचाने का काम किया।


बता दें कि सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल 4th पैरा के अफसर मेजर रोहित सूरी को कीर्ति चक्र और कमांडिंग ऑफिसर कर्नल हरप्रीत संधू को युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित गया है। इस टीम को चार शौर्य चक्र और 13 सेवा मेडल भी प्रदान किए गए हैं। कर्नल हरप्रीत संधू को लांच पैड्स पर दो लगातार हमले करने की जिम्मेवारी दी गई थी।

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कैसे सर्जिकल स्ट्राइक को दिया गया अंजाम

इस मिशन को अंजाम देने के लिए सेना को एक खास रात का इंतजार था जिसे हम अमावस्या की रात के नाम से जानते हैं। आखिरकार वह वक्त आया और 28 और 29 सितंबर की दरमियानी रात को मेजर रोहित सूरी की अगुआई में आठ जवानों की एक टीम आतंकियों के दांत खट्टे करने निकल पड़ी। मेजर सूरी की टीम ने पहले इलाके की रेकी की। मेजर सूरी ने टीम को आदेश दिया कि वे आतंकियों को उनके एक लांच पैड पर खुले इलाके में चुनौती दें। सूरी और उनके साथी टार्गेट के 50 मीटर के दायरे के अंदर तक पहुंच गए और वहां दो आतंकियों को ढेर कर दिया।


इसी बीच यूएवी ने जंगल में दो आतंकियों के हलचल होने के संकेत दिए। मोहित सूरी ने खुद की जान की परवाह ना करते हुए इन आतंकियों को ललकारा। थोड़ी ही देर में दोनों आतंकवादी ढेर हो गए। दूसरे मेजर को आतंकियों के लांच पैड पर निगाहें रखने को कहा गया। यह अफसर अपनी टीम के साथ हमले के 48 घंटे पहले ही एलओसी पार कर गए थे।

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आतंकियों के ठिकाने को किया तबाह

इसके बाद से हमले तक इस टीम ने टार्गेट पर होने वाले हर हलचल पर पैनी नजर रखी। टीम ने इलाके का नक्शा तैयार करने के साथ ही दुश्मनों के ऑटोमैटिक हथियारों की तैनाती की जगह का भी पता लगाया। उन जगहों की तलाश की गई, जहां से भारतीय जवान सुरक्षित रहकर दुश्मन को निशाना बना सके। इस दौरान आतंकियों के एक हथियार घर को तबाह कर दिया। इसमें दो आतंकी मारे गए। बदकिस्मती से एक अन्य हथियार घर से हो रही फायरिंग की जद में मेजर के हाथ आ गए। मेजर सूरी अकेले ही हथियार घर तक पहुंचे और फायरिंग कर रहे उस आतंकवादी को भी मार डाला।


इसी बीच तीसरे मेजर ने अपने साथियों के साथ मिलकर आतंकियों के कैंप को तबाह कर दिया। वहां सो रहे सभी आतंकवादी मारे गए। यह अफसर ऑपरेशन के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों को ताजा घटनाक्रम के बारे में हर अपडेट देता रहा।

 

जवानों और मेजर ने दिखाई गजब की वीरता

जिस मेजर को सेना मेडल मिला है, उसने दुश्मनों के ऑटोमैटिक हथियार से लैस एक ठिकाने को बेहद नजदीक से एक ग्रेनेड हमले में तबाह कर दिया। इसमें दो आतंकवादी मारे गए।
ऑपरेशन के दौरान ही सेना की एक टीम आतंकियों की भारी फायरिंग में घिर गई। ऐसे में आतंकी कुछ कर पाते, पांचवें मेजर ने अपनी सुरक्षा की परवाह ना करते हुए इन आतंकियों पर धावा बोल दिया। आतंकियों के पास उनका कोई जवाब नहीं था और तीनों आतंकवादी ढेर हो गए।


दिलचस्प बात यह है कि इस ऑपरेशन में किसी भारतीय फौजी को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ी। वैसे निगरानी करने वाली टीम का एक पैराट्रूपर जरूर जख्मी हो गया।

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