राजनीति

39 भारतीयों की मौत पर सुषमा ने कहा, कांग्रेस कर रही है ओछी सियासत

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 20 , 2018 , 20:13 IST

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इराक में 39 भारतीयों की मौत की पुष्टि की पर कांग्रेस के हंगामे और सवालों पर सिलसिलेवार जवाब दिया। उन्होंने सीधे-सीधे विपक्ष की संवेदनहीनता के लिए कांग्रेस नेतृत्व को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि 39 में से 38 शवों को लाने के लिए विदेश राज्यमंत्री जनरल वी. के. सिंह इराक जाएंगे।

सुषमा स्वराज ने कहा, 'आज कांग्रेस बेहद ओछी राजनीति कर रही है। शायद कांग्रेस अध्यक्ष ने सोचा कि राज्यसभा में कैसे कोई हंगामा नहीं हुआ तो उन्होंने सिंधियाजी से लोकसभा में विरोध की अगुआई करने को कहा। मौत पर राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है।' उन्होंने आगे कहा, 'राज्यसभा में हर किसी ने मुझे बहुत ही धैर्य और शांति से सुना। हर किसी ने श्रद्धांजलि दी, मैंने सोचा कि लोकसभा में भी ऐसा ही होगा।

लेकिन पिछले कुछ दिनों के हंगामे के उलट आज कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधियाजी की अगुआई में विरोध किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।' बता दें कि मंगलवार को सुषमा स्वराज जब लोकसभा को इराक में मारे गए 39 भारतीयों के मौत की जानकारी दे रही थीं, उस समय विपक्ष हंगामा कर रहा था। विपक्ष के हंगामे से स्पीकर भी आहत दिखीं और उन्होंने विपक्ष से संवेदनशीलता बरतने की अपील भी की, लेकिन हंगामा जारी रहा।

पूरी तरह से किया प्रयास-:

सुषमा ने कहा, 2014 की घटना है जून की और आज 2018 का मार्च आ गया। इस दौरान हमने हर मुमकिन कोशिश की, जो कुछ भी किया जा सकता था, सरकार ने वह सब कुछ किया..प्रधानमंत्रीजी ने कोशिश की...मैंने खुद तमाम विदेश मंत्रियों से बात की।' उन्होंने कहा, 'मैंने बार-बार कहा कि जब तक सबूत नहीं मिल जाते, हम लापता भारतीयों को मरा हुआ नहीं मानेंगे...जब सबूत मिला तो हमने कबूल किया।

पीड़ित परिवारों के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब-:

सुषमा ने सरकार पर पीड़ित परिवारों की तरफ से लग रहे आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'पहला सवाल की हमने परिवार वालों को पहले क्यों नहीं बताया...संसद को क्यों बताया...तो यह संसद की परंपरा है कि संसद सत्र चल रहा हो तो अहम जानकारियां संसद में दी जाती हैं...मैंने पहले ही कहा था कि जैसे ही कोई पुख्ता सबूत मिला तो सबसे पहले संसद को बताऊंगी...अगर सत्र नहीं चल रहा होता तो ट्वीट कर देश को बताती।'

लाखों लाशों में से भारतीयों की लाशों की कैसे पहचान हुई, इस सवाल के जवाब में सुषमा ने कहा, 'दूसरा ये सवाल उठ रहा है कि लाखों लोगों में इनकी लाशें कैसे मिल गई...जब डीएनए सैंपल लिए गए तो क्या उस समय पता था कि वे मर चुके थे?...मोसुल की मुक्ति के 20-25 दिनों बाद भी जब लापता भारतीयों का पता नहीं चला तो हमने शवों की जांच का फैसला किया था, इसीलिए डीएनए सैंपल लिए गए...इराकी विदेश मंत्री से गुजारिश की गई जिस पर उन्होंने डीएनए सैंपल देने की बात कही थी...हमने पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और बिहार- इन चारों राज्यों से परिजनों का डीएनए इकट्ठा करने को कहा।'

हमने किया बड़ा प्रयास-:

सुषमा ने कहा, 'हमने किसी को अंधेरे में नहीं रखा, झूठी दिलासा नहीं दी...यह अथक प्रयास था..अभूतपूर्व प्रयास था। मोसुल की मुक्ति के बाद जनरल साहब वहां 3 बार गए। 9 जुलाई 2017 को मोसलु मुक्त हुआ तो 10 तारीख को जनरल साहब वहां पहुंच गए।' विदेश मंत्री ने कहा कि शायद भारत पहला ऐसा देश है जो आईएस के हाथों मारे गए अपने सभी लोगों के शवों को स्वदेश ला रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे तसल्ली है कि मैंने जो वचन दिया था, उसे पूरा किया।


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