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AIIMS का कारनामा, पहली बार जुड़वा बच्चों के दिमाग को सर्जरी से किया अलग

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अक्टूबर 27 , 2017 , 06:50 IST

 

दिल्ली के एम्स के 30 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने गुरुवार को 18 घंटे की मैराथन सर्जरी के बाद सिर से जुड़े जुड़वा बच्चों को अलग किया। यहां के डॉक्टरों की कोशिश से जग्गा और कलिया के शरीर और जान आखिर अलग हो गये। मां के पेट से एक साथ जन्म लेने के बाद ढाई साल तक दोनों एक-दूसरे से जुड़े रहे। इनकी सलामती की लाखों-करोड़ों लोगों की दुआएं कबूल हुईं। एम्स के 30 डॉक्टरों सहित 80 लोगों की चिकित्सीय टीम ने 36 घंटे के बाद गुरुवार तड़के 3 बजे ऑपरेशन पूरा किया। ऑपरेशन थिएटर से बाहर आते वक्त डॉक्टरों के खिलखिलाते चेहरे उनकी खुशी को बयां कर रहे थे।

हालांकि आने वाले 20 दिन अभी इन भाइयों के लिए चुनौतियों से भरे बताए जा रहे हैं।बता दें कि उड़ीसा निवासी जग्गा और कलिया जन्म से ही एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। इनके दिमाग का 30 फीसदी हिस्सा आपस में जुड़ा था। 13 जुलाई को एम्स आने के बाद पहली सर्जरी 28 अगस्त को 20 डॉक्टरों ने मिलकर की थी। इसके बाद दूसरी सर्जरी बुधवार सुबह 9 बजे से शुरू हुई थी। रात करीब 9 बजकर 55 मिनट पर ऑपरेशन पूरा हुआ। इसके बाद गुरुवार सुबह 9 बजे तक प्लास्टिक सर्जरी भी पूरी हुई।

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ऐसे हुई मैराथन सर्जरी-

जग्गा और बलिया का अलग करने के लिए बुधवार सुबह नौ बजे सर्जरी शुरू हुई। इसके 11 घंटे बाद यानी रात 8 बजकर 45 मिनट पर डॉक्टरों को दोनों को सिर से अलग करने में सफलता मिली। अगले पांच घंटे दोनों की प्लास्टिक सर्जरी हुई, जिसमें उनकी पीठ और जांघों से त्वचा लेकर उनकी सर्जरी की गई। रात करीब 12 बजे एक बच्चे को आइसीयू में शिफ्ट किया गया, जबकि हालत नाजुक होने के चलते दूसरे बच्चे को भी तड़के करीब तीन बजे आइसीयू वार्ड में लाया गया।

यह था मामला-

जग्गा और बलिया जन्म से ही जुड़े हुए थे। उनके दिमाग का 30 फीसद हिस्सा जुड़ा हुआ था। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि यह एक दुर्लभ बीमारी होती है, जो 30 लाख में से एक बच्चे में होती है। इनमें से भी 50 फीसद बच्चों की या तो जन्म के समय या जन्म के 24 घंटे के अंदर मृत्यु हो जाती है।

बुधवार सुबह नौ बजे सर्जरी शुरू हुई। इसके 11 घंटे बाद यानी रात 8 बजकर 45 मिनट पर डॉक्टरों को दोनों को सिर से अलग करने में सफलता मिली। अगले पांच घंटे दोनों की प्लास्टिक सर्जरी हुई, जिसमें उनकी पीठ और जांघों से त्वचा लेकर उनकी सर्जरी की गई। रात करीब 12 बजे एक बच्चे को आइसीयू में शिफ्ट किया गया, जबकि हालत नाजुक होने के चलते दूसरे बच्चे को भी तड़के करीब तीन बजे आइसीयू वार्ड में लाया गया।

यह था मामला-

जग्गा और बलिया जन्म से ही जुड़े हुए थे। उनके दिमाग का 30 फीसद हिस्सा जुड़ा हुआ था। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि यह एक दुर्लभ बीमारी होती है, जो 30 लाख में से एक बच्चे में होती है। इनमें से भी 50 फीसद बच्चों की या तो जन्म के समय या जन्म के 24 घंटे के अंदर मृत्यु हो जाती है।

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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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