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Make In India को झटका, TESLA अब भारत में नहीं शंघाई में बनाएगी इलेक्ट्रिक कार

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 24 , 2017 , 19:45 IST

अमेरिकी ऑटोमोबाइल कंपनी टेस्ला अपनी इलेक्ट्रिक कारों की मैन्यूफैक्चरिंग अब भारत के बजाय चीन के शंघाई में शुरू करने जा रही है। वहीं देश में मोदी सरकार बीते एक साल से टेस्ला और एप्पल जैसी कंपनियों को भारत में मैन्यूफैक्चरिंग करने की मंजूरी देने पर विचार कर रही है। क्या हम मेक इन इंडिया की शर्तों पर खरे उतरने वाली कंपनियों को पहचानते रह जाएंगे और एक-एक कर मल्टीनेशनल कंपनियां दूसरे देशों में अपनी फैक्ट्रियां लगाती रहेंगी?

Tesla

वाल स्ट्रीट जर्नल ने किया खुलासा

टेस्ला इंक के प्रमुख इलॉन मस्क और चीन सरकार में नई फैक्ट्री लगाने के लिए शंघाई शहर को चुनने पर सहमति बन चुकी है। यह दावा वॉल स्ट्रील जर्नल ने किया है। अमेरिका से बाहर यह टेस्ला की पहली फैक्ट्री होगी जहां भविष्य के लिए एमीशन फ्री गाड़ियों का निर्माण किया जाएगा। इस सहमति के लिए चीन सरकार ने मेक इन चाइना की कई शर्तों को दरकिनार करते हुए शंघाई के फ्री ट्रेड जोन में टेस्ला की इस इकाई को मंजूरी दी होगी।

मेक इन इंडिया के तहत विदेशी कंपनी को कल-पुर्जे भारत में बनाने होंगे

भारत अपनी सड़को पर इलेक्ट्रिक कार दौड़ाना चाहता है। उसकी कोशिश है कि 2030 तक वह देश में इलेक्ट्रिक कारों के ज्यादातर वैरिएंट को बेचे। इसके बावजूद उसने टेस्ला जैसी कंपनी को देश में फैक्ट्री लगाने के लिए प्रोत्साहित करने की कोई कोशिश नहीं की। लेकिन सवाल यह नहीं कि चीन में टेस्ला की फैक्ट्री लगाने का फैसला हो जाने के बाद अब भारत में टेस्ला की दूसरी इकाई नहीं लग सकती। लेकिन यहां समस्या यह है कि भारत मेक इन इंडिया की शर्त पर अड़ा है कि किसी भी विदेशी कंपनी को भारत में मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत उत्पादन करना है तो उसे कम से कम 30 फीसदी कल-पुर्जे भारत से ही लेने होंगे।

Tesla 3

लिहाजा, अभी जब भारत में इलेक्ट्रिक कारों का न तो नामो निशान है और न ही उसके कल पुर्जे कोई बना रहा है तो मेक इन इंडिया कार्यक्रम चाहता है कि देश में आकर इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी पहले एक-तिहाई कल-पुर्जे बनाने की एंसिलियरी यूनिट भारत में लगाए और तब जाकर उसे मेक इन इंडिया के तहत देश में मैन्यूफैक्चरिंग करने की मंजूरी मिले।

इसी शर्त में फंसा एप्पल की आईफोन फैक्ट्री

मेक इन इंडिया की इस शर्त से टेस्ला अकेले नहीं परेशान है। ठीक ऐसा ही अमेरिकी स्मार्टफोन कंपनी एप्पल के साथ हो रहा है। बीते एक साल से एप्पल कोशिश में है कि वह अपने स्मार्टफोन समेत अन्य प्रोडक्ट की मैन्यूफैक्चरिंग भारत में करे। लेकिन उसके सामने भी मुसीबत एक तिहाई कल-पुर्जों को भारत से प्राप्त करने की है। एप्पल का मानना है कि उसके कल-पुर्जे बेहद की सूक्ष्म तकनीकि से विकसित हुए है और दुनिया के चुनिंदा जगहों पर उनकी मैन्यूफैक्चरिंग की जा रही है। लिहाजा, भारत में एप्पल के उत्पाद बनाने के लिए एप्पल के लिए जरूरी है कि वह अपने इन्हीं सप्लायर से कल-पुर्जों को प्राप्त करे क्योंकि भारत में ऐसे प्रोडक्ट के लिए पुर्जे तैयार करने की क्षमता अभी नहीं है। लिहाजा, इसी शर्त पर फिलहाल एप्पल और भारत सरकार की बातचीत चल रही है और उम्मीद है कि यह बातचीत की किसी निष्कर्श पर न पहुंचे।

 

 


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