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धारा 377 पर बोले थरूर- यह सेक्स नहीं आजादी है, सरकार के लिए बेडरूम में जगह नहीं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 6 , 2018 , 19:58 IST

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय के समलैंगिकता को अपराध नहीं करार देने के फैसले को 'आजादी की सुबह' करार दिया और कहा कि बेडरूम में सरकार के लिए कोई जगह नहीं है। शीर्ष अदालत द्वारा भारत में एलजीबीटीआईक्यू (समलैंगिक समुदाय) के पक्ष में फैसला सुनाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले को सुनकर वह बहुत खुश हैं।

थरूर ने कहा, "हमने सरकार को अपनी निजी जिंदगियों में तांकझांक करने की इजाजत दी थी लेकिन शीर्ष न्यायालय लोगों की गरिमा को बरकरार रखने के साथ खड़ा है। यह सेक्स नहीं है, यह आजादी है क्योंकि सरकार के लिए बेडरूम में कोई जगह नहीं है, यह वयस्कों के बीच होने वाले निजी कृत्य हैं। यह आजादी की सुबह है।"

थरूर ने कहा कि लोकसभा में उन्होंने दो मौकों पर निजी विधेयक लाने का प्रयास किया लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदस्यों द्वारा उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया। 

थरूर ने कहा, "तब मैंने कहा था कि केवल न्यायपालिका ही ऐसा कर सकती है और यह फैसला उन भाजपा नेताओं के लिए शर्म की बात है, जिन्होंने इसका विरोध किया था।"

एलजीबीटीआईक्यू कार्यकर्ता आर. रेनजु ने इस ऐतिहासिक फैसले पर खुशी जताई और शीर्ष अदालत की सराहना की। उन्होंने कहा, "एक भारतीय होने के नाते मैं हमेशा गर्व महसूस करता हूं और अब हम 27वें देश बन गए हैं, जिसने समलैंगिकता को वैध किया है। अब मुझे भारतीय होने पर और भी ज्यादा गर्व है।"

बता दें कि समलैंगिकता को अपराध करार देने वाली आईपीसी की धारा 377 के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि समलैंगिकता अपराध नहीं है। देश में सबको समानता का अधिकार है। LGBT को भी समानता से रहने का अधिकार है। 

इससे पहले 17 जुलाई को चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि अगर कोई कानून मौलिक अधिकारों का हनन करता है तो कोर्ट इस बात का इंतज़ार नहीं करेगा कि सरकार उसे रद्द करे। अगर हम समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर भी करते हैं, तब भी किसी से जबरन समलैंगिक संबंध बनाना अपराध ही रहेगा।

क्‍या है धारा 377

आईपीसी की धारा- 377 के तहत 2 लोग आपसी सहमति या असहमति से अप्राकृतिक संबंध बनाते हैं और दोषी करार दिए जाते हैं, तो उनको 10 साल की सजा से लेकर उम्रकैद की सजा हो सकती है और ये गैर-जमानती है।


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