राजनीति

एम करुणानिधि: तमिल फिल्म इंडस्ट्री में अपनी कलम के सहारे बनाया खास मुकाम

शुभा सचान , न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 8 , 2018 , 08:27 IST

एम करुणानिधि एक ऐसी शख्सियत जिसनें अपनी जिंदगी में कभी हार नहीं मानीं। एक ऐसा चेहरा जिसने तमिल फिल्मों के जरिए विधवा पुनर्विवाह, छुआछूत, जमींदारी का खात्मा कर दिया। एक ऐसी शख्सियत जिसने अपनी कलम के दम पर धर्म के नाम पर अंधविश्वास जैसे सामाजिक मुद्दो पर कहानी लिखी।

तमिल फिल्म इंडस्ट्री में योगदान

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके चीफ एम करुणानिधि को भले ही आज लोग राजनेता के तौर पर जानते हों लेकिन फिल्मी और साहित्य की दुनिया में उन्होनें एक अलग मुकाम बनाया। अपने करियर की शुरूआत उन्होने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में एक स्क्रिप्ट राइटर के रूप में की थी। उन्हें समाजवादी और बुद्धिवादी आदर्शों को बढ़ावा देने वाली समाज सुधार कहानियां लिखने के लिए जाना जाता था।

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20 वर्ष की उम्र से पटकथा लेखन की शुरूआत

सिर्फ 20 वर्ष की आयु में करुणानिधि ने ज्यूपिटर पिक्चर्स के लिए पटकथा लेखक के रूप में कार्य शुरु किया। उन्होंने अपनी पहली फिल्म 'राजकुमारी' से लोकप्रियता हासिल की। पटकथा लेखक के रूप में उनके हुनर में यहीं से निखार आना शुरु हुआ। उनके द्वारा लिखी गई 75 पटकथाओं में 'राजकुमारी', 'अभिमन्यु', 'मंदिरी कुमारी', 'मरुद नाट्टू इलवरसी', 'मनामगन', 'देवकी' पनाम और थंगारथनम समेत कई फिल्में शामिल हैं।

साहित्य में रुचि

'तुक्कु मेडइ' नाटक के महान एक्टर एम. आर. राधा ने करुणानिधि को 'कलईगनर' की उपाधि दी थी। करुणानिधि ने ही ये नाटक लिखा था। 64 साल के करियर में 69 फिल्में करने वाले करुणानिधि सिर्फ सिनेमा ही नहीं साहित्य में भी काफी रुचि रखते थे। उनके घर में करीब 10 हजार से ज्यादा किताबे हैं।

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द्रविड़ आंदोलन

उन्होंने पराशक्ति नामक फिल्म के माध्यम से अपने राजनीतिक विचारों का लोगों के बीच प्रचार करना शुरू किया। यह फिल्म तमिल सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इसमें द्रविड़ आंदोलन की विचारधारा का समर्थन किया गया था। शुरुआत में इस फिल्म पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था लेकिन साल 1952 में इसे रिलीज कर दिया गया। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस में बड़ी हिट साबित हुई।

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करुणानिधि का नाटकों में अहम रोल

करुणानिधि न सिर्फ फिल्म के लिये पटकथा लेखक थे, बल्कि नाटकों में भी शामिल थे। मनिमागुडम, ओरे रदम, पालानीअप्पन, तुक्कु मेडइ, कागिदप्पू, नाने एरिवाली, वेल्लिक्किलमई, उद्यासूरियन और सिलप्पदिकारम जैसे नाटक और रोमपुरी पांडियन, तेनपांडि सिंगम, वेल्लीकिलमई, नेंजुकू नीदि, इनियावई इरुपद, संग तमिल, कुरालोवियम, पोन्नर शंकर, तिरुक्कुरल उरई आदि किताबें लिखीं। उन्होंने विश्व शास्त्रीय तमिल सम्मलेन 2010 के लिए आधिकारिक विषय गीत "सेम्मोज्हियाना तमिज्ह मोज्हियाम" लिखा जिसे उनके अनुरोध पर ए. आर. रहमान ने म्यूजिक दिया था।

 


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