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टेस्ट क्रिकेट में ख़त्म नहीं होगी 141 साल पुरानी टॉस की परंपरा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 31 , 2018 , 13:18 IST

2019 में शुरू हो रही टेस्ट चैंपियनशिप में भी टॉस की परंपरा खत्म नहीं की जाएगी। अनिल कुंबले के नेतृत्व वाली ICC क्रिकेट कमेटी ने लंबी बैठक के बाद ये सिफारिश आईसीसी को दी है। 

कमेटी ने टेस्ट चैंपियनशिप के तहत सीरीज जीत के लिए टीमों को कोई पॉइंट न देने की भी सिफारिश की है। हर मैच के नतीजे के आधार पर पॉइंट दिए जाएंगे। कमेटी ने बॉल टैम्परिंग और अभद्र व्यवहार पर सजा के प्रावधान को और कड़ा करने की सिफारिश भी की है।

हर मैच के नतीजे के आधार पर पॉइंट क्यों?

कमेटी ने टेस्ट चैंपियनशिप के हर मैच को बराबर महत्व देने के लिए मैच के नतीजे के आधार पर पॉइंट देने का फैसला किया है, न कि सीरीज के आधार पर।

अगर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में कोई टीम पहले दो टेस्ट जीत भी लेती है तो भी तीसरे मैच में जीत की उसकी कोशिश कम नहीं होगी, क्योंकि उस मैच के अंक का चैंपियनशिप में आगे असर पड़ सकता है।

किसने और कब रखा था टॉस खत्म करने का प्रस्ताव?

एशेज-2015 के दौरान तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने टेस्ट मैचों में टॉस खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। उनका कहना था इससे घरेलू टीमों का पिच के मामले में दखल देना कम होगा।

पोंटिग के इस विचार को स्टीव वॉ और माइकल होल्डिंग जैसे दिग्गजों का भी समर्थन मिला था।

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने 2016 में खेली गई काउंटी चैंपियनशिप में टॉस खत्म करने का प्रयोग भी किया था, जिसके मिले-जुले परिणाम सामने आए थे।

बॉल टैम्परिंग मामले के बाद सजा कड़ी करने की सिफारिश

ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीका सीरीज को ध्यान में रखते हुए बॉल टैम्परिंग और मैच के दौरान खराब व्यवहार के लिए अभी दी जा रही सजा को आईसीसी से और कड़ी करने की सिफारिश की गई थी।

बॉल टैम्परिंग मामले में आईसीसी ने ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ पर एक मैच का बैन लगाया था। कैमरून बेनक्रॉफ्ट पर मैच फीस का 75 फीसदी जुर्माना लगाया गया था। डेविड वार्नर को कोई सजा नहीं मिली थी।

 

टॉस टेस्ट क्रिकेट में 141 साल पुरानी परंपरा

क्रिकेट की दुनिया में होने वाले हर मैच से पहले टॉस के जरिए यानी सिक्का उछालकर ये तय किया जाता है कि कौन सी टीम पहले बैटिंग या फील्डिंग करेगी। ये टेस्ट क्रिकेट में 141 साल पुरानी परंपरा है। 
टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत साल 1877 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न के एमसीजी ग्राउंड में हुए मैच से हुई थी। तब से मैच से पहले सिक्के को उछालकर ये तय किया जाता है कि कौन सी टीम पहले बैटिंग करेगी और कौन सी टीम पहले फील्डिंग करेगी।

मेजबान टीम को कैसे होता है फायदा?


नौ टीमों की भागीदारी वाली आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप में मेजबान टीमें अपने पसंद की पिच बनाकर फायदा न उठाए, इसके लिए टॉस समाप्त करने की बात चल रही थी। ऐसा होने पर मेहमान टीम को यह हक मिलता कि वह पहले बैटिंग करना चाहती है या बॉलिंग। लेकिन, आईसीसी कमेटी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि टॉस हमेशा से क्रिकेट का अभिन्न हिस्सा रहा है और इसे खत्म करना ठीक नहीं होगा।


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