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मंच पर गाने से घबराती थीं कविता लेकिन बन गईं बॉलीवुड में गीतों की रानी (जन्मदिन विशेष)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 24 , 2018 , 22:17 IST

'मईया यशोदा', 'बोले चूड़ियां', 'हवा हवाई', 'नींद चुराई मेरी', 'निंबूड़ा' जैसे गीत जैसे ही कानों में सुनाई देते हैं, एक चेहरा और एक नाम भी जेहन में उतर आता है। यह नाम है पाश्र्वगायिका कविता कृष्णमूर्ति का। कविता कृष्णमूर्ति की पहचान हालांकि उनके चेहरे से नहीं, बल्कि उनकी सुरीली आवाज से है, जो हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है। 

बॉलीवुड के कई शीर्ष संगीतकारों के साथ काम कर चुकीं कविता अबतक कोई 15,000 से अधिक गानों को अपनी आवाज दे चुकी हैं। कविता जिन संगीतकारों और गीतकारों के साथ काम कर चुकी हैं, उनमें लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, नौशाद, एस.एच. बिहारी, कैफी आजमी, अंजन, ओपी नय्यर, खय्याम, हेमंत कुमार, रविंद्र जैन, बप्पी लाहिड़ी, समीर, जावेद अख्तर प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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कविता कृष्णमूर्ति का जन्म 25 जनवरी, 1958 को दिल्ली में हुआ था। उनके जन्म का नाम शारदा कृष्णमूर्ति था। उनके पिता टी.एस. कृष्णमूर्ति शिक्षा मंत्रालय में अधिकारी थे। कविता की चाची ने उन्हें संगीत की शिक्षा लेने का सुझाव दिया और उन्होंने सुरुमा बसु से उनकी मुलाकात कराई, जिन्होंने कविता को रविंद्र संगीत की शिक्षा दी। 

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कविता ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की औपचारिक शिक्षा शास्त्रीय गायक बलराम पुरी से लेनी शुरू की। वह जब आठ साल की थीं, तभी उन्होंने एक गायन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जीता। उन्होंने 1960 के दशक के मध्य नई दिल्ली में कई अंतर मंत्रालयी संगीत प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते। और इसके साथ ही उनके भीतर गायिका बनने का सपना जवान होने लगा था।

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नौ साल की उम्र में कविता को स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के साथ बांग्ला भाषा में एक गीत गाने का मौका मिला। यहीं से उन्होंने संगीत की दुनिया में उतरने का मुकम्मल फैसला किया। मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई के दौरान कविता हर प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। यही वक्त था, जब एक कार्यक्रम में मशहूर गायक मन्ना डे ने उनका गाना सुना और उन्हें विज्ञापनों में गाने का मौका दिया।

वर्ष 1980 में उन्होंने 'काहे को ब्याही' फिल्म के गीत 'मांग भरो सजन' को अपनी आवाज दी। हालांकि यह गाना बाद में फिल्म से हटा दिया गया था, लेकिन कविता को अब उनकी राह से हटाने वाला कोई नहीं था। इसके बाद 1985 में उनके करियर ने तब उछाल मारा, जब उन्होंने हिंदी फिल्म 'प्यार झुकता नहीं' के गीत 'तुमसे मिलकर ना जाने क्यों' को अपनी आवाज दी और यह गीत सुपर हिट हो गया।

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इसी गीत ने उन्हें पाश्र्वगायिका के रूप में बॉलीवुड में स्थापित कर दिया। इसके बाद फिल्म 'मिस्टर इंडिया' के गाने 'हवा हवाई' और 'करते हैं हम प्यार' ने उन्हें सुपरहिट गायिका का दर्जा दिलाया। 90 के दशक में वह हिंदी सिनेमा की अग्रणी पाश्र्वगायिका बनकर उभरीं। कविता ने एक बार एक साक्षात्कार में बताया था कि बचपन में उन्हें अभिनेता दिलीप कुमार बहुत पसंद थे।उन्होंने अपने करियर में आनंद-मिलिंद, उदित नारायण, ए.आर. रहमान, अनु मलिक जैसे गायकों व संगीत निर्देशकों के साथ काम किया है।

वह शबाना आजमी, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, मनीषा कोईराला और ऐश्वर्य राय बच्चन जैसी अभिनेत्रियों के लिए गाने गा चुकी हैं।कविता ने कई भक्ति गीत भी गाए हैं। वह कई रियलिटी शोज में निर्णायक मंडल की सदस्य भी रही हैं। वह हाल में 'भारत की शान : सिंगिंग स्टार (सीजन 1)' के निर्णायक मंडल में थीं। इस कार्यक्रम का प्रसारण डीडी नेशनल पर हुआ था। वह विजय टीवी एयरटेल सुपर सिंगर और रंग बांग्ला ग्रेट म्यूजिक गुरुकुल में भी उपस्थित हुईं थीं।

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उन्होंने अलिफ लैला (1989), महाभारत (1986), रामायण (1986), श्री कृष्णा, और रामायण (2008) जैसे धारावाहिकों के लिए भी गीत गाए। कविता 11 नवंबर, 1999 को डॉ. एल. सुब्रह्मण्यम के साथ शादी के बंधन में बंध गईं। दोनों की कोई संतान नहीं है, जबकि सुब्रह्मण्यम की पहली पत्नी से चार बच्चे हैं। कविता शादी के बाद अपने परिवार के साथ बेंगलुरू में बस गईं। उन्होंने अपने पति के साथ संगीत संस्थान शुरू किया, जिसका नाम 'सुब्रह्मण्यम एकेडमी ऑफ परफॉर्मिग आर्ट्स' है।

वह अपना एक एप भी लांच कर चुकी हैं, जिसमें एप्पल एप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर के लिए मुफ्त डाउनलोड उपलब्ध है। वर्ष 2005 में उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। सबको थिरकाने और झूमाने वाली गायिका को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।


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