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संघ कभी भी सरकार के कामकाज में दखल नहीं करता : मोहन भागवत

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 18 , 2018 , 19:57 IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से दिल्ली में आयोजित 'भविष्य का भारत' कार्यक्रम के दूसरे दिन RSS प्रमुख मोहन भागवत ने संबोधित करते हुए कहा संघ संविधान को मानकर चलता है। भागवत ने ये भी कहा कि  संविधान के खिलाफ जाकर हमने कोई काम किया हो, ऐसा कोई भी उदाहरण नहीं है।

संघ सरकार के कामकाज पर दखल नहीं करता

भागवत ने संघ और राजनीति के बीच संबंधों पर भी खुलकर बात की। सरकार के कामकाज में दखल के आरोपों और अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि लोग कयास लगाते हैं कि नागपुर से फोन जाता होगा, यह बिल्कुल गलत बात है। भागवत ने साफ कहा कि नागपुर से सरकार नहीं चलती है। उन्होंने कहा, 'केंद्र में काम कर रहे काफी लोग स्वयंसेवक हैं। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आदि स्वयंसेवक रह चुके हैं ऐसे में कई तरह की बातें होती हैं। वास्तव में ये लोग मेरी उम्र के हैं तो राजनीति में वे मुझसे सीनियर हैं। संघ कार्य का जितना मेरा अनुभव है उससे ज्यादा अनुभव उनका राजनीति का है। उनको अपनी राजनीति चलाने के लिए किसी की सलाह की आवश्यकता नहीं है। हम सलाह दे भी नहीं सकते हैं।'  भागवत ने यह जरूर कहा कि हां, उन्हें सलाह चाहिए और हम दे सकते हैं तो हम देते हैं।

सरकार की नीतियों पर संघ का कोई प्रभाव नहीं

संघ प्रमुख ने मोहन भागवत ने कहा कि राजनीति और सरकार की नीतियों पर संघ का कोई प्रभाव नहीं है। वह हमारे स्वयंसेवक हैं और समर्थ हैं अपने क्षेत्र में अपना काम करने के लिए। देश की व्यवस्था में जो सेंटर संविधान से तय हुआ है, वही चलता है और चलना चाहिए, ऐसा हमारा मानना है।

एक ही दल में क्यों सबसे ज्यादा स्वयंसेवक हैं?

संघ का राजनीति से संबंध क्या है? एक ही दल में क्यों सबसे ज्यादा स्वयंसेवक हैं? बाकी दलों में जाने की उनकी इच्छा क्यों नहीं होती है? इन सवालों का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि इस पर उनको विचार करना है। हम किसी भी स्वयंसेवक को किसी एक विशिष्ट राजनीतिक दल का काम करने के लिए नहीं कहते हैं।

संघ में राष्ट्र के लिए एक विचार को लोग

उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लिए एक विचार को लेकर, एक नीति का स्वप्न लेकर काम करने वालों के पीछे खड़े हो जाओ- ऐसा हम जरूर कहते हैं। वह नीति किसी भी दल की हो सकती है। राष्ट्रहित की सोचकर स्वयंसेवक नागरिक के नाते अपना कर्तव्य करते हैं। संघ के कार्य में दायित्व धारी कार्यकर्ता राजनीति में बिल्कुल भी नहीं पड़ते हैं। हां, स्वयंसेवक स्वतंत्र हैं, वह कर भी सकते हैं और नहीं भी।

हिंदुत्व देश का प्राचीन विचार

हिंदुत्व का विचार संघ ने नहीं खोजा, यह पहले से चलता आया है। दुनिया सुख की खोज बाहर कर रही थी, हमने अपने अंदर की। वहीं से हमारे पूर्वजों को अस्तित्व की एकता का मंत्र मिला। विवेकानंद ने रामकृष्ण परमहंस से पूछा था कि क्या आपने भगवान को देखा है, इस पर परमहंस ने कहा कि रोज देखता हूं और मेरी सुनोगे तो तुम भी देख सकोगे। बहुत लोग आज भी हिंदुत्व नहीं सनातन धर्म कहते हैं।


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