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कर्नाटक में बजा चुनावी बिगुल, 12 मई को होंगे चुनाव, सभी केंद्रों पर लगेंगे VVPAT

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 27 , 2018 , 17:25 IST

कर्नाटक का चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए ही बहुत खास माना जा रहा है, एक तरफ जहां लगातार जीत से उत्साहित अमित शाह हैं, वही दूसरी तरफ राहुल गांधी भी अपने नए-नए राजनीतिक हथकंडे अपनाते नजर आ रहे हैं। चुनाव की तारीख आज मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने घोषित कर दिया है। कर्नाटक में 12 मई को चुनाव और 15 मई को रिजल्ट की घोषणा की जाएगी।

224 सीटों में से सरकार बनाने के लिए 113 सीटों की जरूरत होती है। वर्तमान में सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास 122 सीटें हैं जबकि बीजेपी के पास 43 और जेडीएस के पास 37 सीटें हैं। कर्नाटक विधानसभा चुनावों का ऐलान करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि राज्य में 56 हजार पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे। दिव्यांगों के लिए पोलिंग बूथ पर खास इंतजाम होंगे। 450 से ज्यादा पोलिंग बूथ की व्यवस्था महिलाएं संभालेंगी।

10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू कर दी गई है। एक उम्मीदवार चुनाव प्रचार के लिए 28 लाख रुपए खर्च कर सकता है। सभी पोलिंग बूथों पर EVM के साथ VVPAT की सुविधा भी रहेगी। महिला वोटरों का रखा जाएगा विशेष ध्यान।

जानें राज्य की चुनावी स्थिति-:

चुनाव की तारीखों का मंगलवार को एलान हो गया। राज्य की 224 सीटों के लिए एक फेज में 12 मई को मतदान होगा। 15 मई को नतीजे आएंगे। यहां अभी कांग्रेस की सरकार है। मौजूदा सीएम सिद्धारमैया का मुकाबला दो बार सीएम रहे भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा से है। एक बार पार्टी छोड़कर जा चुके येदियुरप्पा को भाजपा ने पिछले साल मई में ही सीएम कैंडिडेट घोषित कर दिया था। कांग्रेस सरकार 17% आबादी वाले लिंगायतों को अल्पसंख्यकों का दर्जा दे चुकी है।

Election KARNATAKA shedule

क्या है दोनों पार्टी के चेहरों की मजबुरी-:

भाजपा के पास येदियुरप्पा और कांग्रेस के पास सिद्धारमैया के अलावा कोई और चेहरा नहीं है, जिसे आगे रखकर दोनों दल चुनाव लड़ सकें।

- सिद्धारमैया:

69 साल के सिद्धारमैया 2013 से मुख्यमंत्री हैं। इनके नेतृत्व में कांग्रेस ने पिछली बार भाजपा को हराकर 122 सीटें जीतीं। उन्होंने पिछले कुछ वक्त से एक ऐसे नेता के रूप में अपनी छवि बनाने की कोशिश की है, जो भाजपा के हिंदी और हिंदू के नारे का विरोध करता है। वे अपने भाषणों में कन्‍नड़ और दक्षिण भारतीय अस्मिता की बात करते रहे हैं। सिद्धारमैया कुरुबा समुदाय से हैं। कुल आबादी में इनकी 8% हिस्सेदारी है। उन्होंने भाजपा को रोकने के लिए लिंगायतों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का कार्ड खेला है।

- येदियुरप्पा: 75 साल के येदियुरप्पा लिंगायत नेता हैं। राज्य में 17% लिंगायत वोटर हैं। वे 2007 में एक बार सात दिनों के लिए और बाद में 2008 में सीएम बने। 2008 में उन्होंने अपने दम पर भाजपा को जिताया। भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद पार्टी की ओर से उन पर दबाव बना। उन्हें 2011 में मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा।

इससे नाराज होकर येदियुरप्पा ने 2012 में भाजपा ही छोड़ दी और कर्नाटक जनता पार्टी (केजेपी) का गठन किया। उनके पार्टी से अलग होने के बाद 2013 में भाजपा चुनाव हार गई। उसे सिर्फ 40 सीटें मिलीं।

- 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त मोदी उन्हें फिर बीजेपी में ले आए। इस चुनाव में भाजपा को राज्य की 28 में से 17 लोकसभा सीटें मिलीं।

Election KARNATAKA (1)

तीन बड़े चेहरों पर रहेगा पूरा दारोमदार-:

1) नरेंद्र मोदी-:

-भाजपा को उम्मीद है कि फिर मोदी लहर चलेगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को राज्य की 28 में से 17 सीटें मिली थीं। वोट शेयर 42.4% रहा था।

2) राहुल गांधी-:

- पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका चौथा विधानसभा चुनाव है। इससे पहले उन्होंने त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में कैम्पेनिंग की थी। हालांकि, कांग्रेस मेघालय में सरकार नहीं बचा पाई थी। बाकी दो राज्यों में भी सरकार नहीं बना पाई।

3) अमित शाह-:

- राज्य में भाजपा को कामयाबी दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। उन्होंने 16 केंद्रीय मंत्रियों, 24 सांसदों समेत 55 लोगों की एक टीम तैयार की है। इसे मार्च के आखिर तक रिपोर्ट देनी है। शाह ने 16 केंद्रीय मंत्रियों को चार-चार विधानसभा सीटों का जिम्मा दिया है। खुद भी एक महीने में दूसरी बार राज्य के दौरे पर पहुंचे हैं।


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