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राज्यसभा में मोदी सरकार की बुधवार को होगी अग्निपरीक्षा, पेश होगा तीन तलाक बिल

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 2 , 2018 , 11:28 IST

तीन तलाक पर पर मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 बिल बुधवार को राज्य सभा में पेश किया जाएगा। लोक सभा में ये बिल पहले ही पारित हो चुका है लेकिन राज्य सभा में बीजेपी के पास बहुमत नहीं है, इसलिए बिल पास कराना मोदी सरकार के लिए टेड़ी खीर होगा। इस दौरान सरकार और विपक्षी दल आमने-सामने हो सकते हैं।

गैर भाजपा दल इस विधेयक की विस्तृत समीक्षा के लिए इसे प्रवर समिति के पास भेजने की मांग कर सकते हैं।

संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने बताया विधेयक पर आगे का रुख तय करने के लिए विपक्षी दल 
बुधवार सुबह मिलने वाले हैं। इस विधेयक को गुरुवार को लोकसभा पारित कर चुकी है जहां सरकार बहुमत में है।

लेकिन, राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है। ऐसे में सरकार विधेयक को सदन में पारित कराने के लिए कुछ विपक्षी दलों के संपर्क में है।

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2017 बुधवार को राज्यसभा में विचार व पारित कराने के लिए सूची में है।

Teen-Talaq

इसके बाद से किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक, वह चाहें मौखिक हो या लिखित हो और या फिर मैसेज के जरिए हो, अवैध होगा। जो भी तीन तलाक देगा, उसको तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है यानी तीन तलाक देना गैर-जमानती और संज्ञेय ( Cognizable) अपराध होगा।

इसमें मजिस्ट्रेट तय करेगा कि कितना जुर्माना होगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए एक मंत्री समूह बनाया था, जिसमें राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, रविशंकर प्रसाद, पीपी चौधरी और जितेंद्र सिंह शामिल थे।

बता दें कि कांग्रेस व कुछ अन्य दलों ने लोकसभा में मांग की थी कि विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा जाए लेकिन सरकार ने इस मांग को ठुकरा दिया था। विपक्ष द्वारा विधेयक में सुझाए गए संशोधनों को भी खारिज कर दिया गया था।

विपक्षी सूत्रों का कहना है कि कई दल विधेयक को ऊपरी सदन की प्रवर समिति के पास भेजने के पक्ष में हैं। कांग्रेस में एक विचार यह पाया जा रहा है कि अगर तीन तलाक को दंडनीय बनाने या सजा की अवधि कम किया जाना संभव न हो तो भी पार्टी को इसे जमानती मामला बनाए जाने पर जोर देना चाहिए।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि उनकी पार्टी तीन तलाक का विरोध करती है और इसका खात्मा चाहती है। लेकिन विधेयक में एक आपराधिक पहलू जोड़ दिया गया है। (मुसलमानों में) विवाह एक नागरिक संविदा है और नया कानून इसमें एक आपराधिक पहलू जोड़ रहा है जो कि गलत है।

उन्होंने कहा, " भाजपा राजनैतिक लाभ और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए इस विधेयक को जल्दबाजी में लेकर आई है।"

वैसे भी तीन तलाक बिल पर बहस के दौरान लोकसभा में जिस तरह से बार-बार शाहबानो मामले को लेकर कांग्रेस पर हमला हुआ और उसके नेताओं को नजरें नीची करके सुनना पड़ा, उसके बाद से कांग्रेस तीन तलाक को लेकर बहुत आक्रामक रुख अपनाने की हालत में नहीं दिखती। 

इन सबके बावजूद हो सकता है कि कांग्रेस इस बिल से तुरंत तीन तलाक को गैर जमानती बनाने के प्रावधान को हटाने पर जोर डाले। लोकसभा में बहस के दौरान भी कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह बात कही थी, लेकिन राज्यसभा में हो सकता है कि कांग्रेस इस बात पर जोर देकर इस बिल को प्रवर समिति (select committee) के पास  के पास भेजने की मांग करे।


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