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SC के फैसले के खिलाफ दलित-आदिवासी संगठनों ने बुलाया भारत बंद

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 5 , 2019 , 10:37 IST

देश के कई राज्यों में आज आदिवासी समूहों ने भारत बंद बुलाया है। यह बंद सुप्रीम कोर्ट के 13 फरवरी के फैसले के खिलाफ बुलाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को फैसला सुनाते हुए कहा था कि 21 राज्यों के 11.8 लाख वनवासियों और आदिवासियों को वनभूमि से बेदखल कर दिया जाएगा लेकिन बाद में निर्देश पर रोक लगा दी गई थी। वहीं इस भारत बंद को कई राजनीतिक पार्टियां और कई राजनेताओं का भी समर्थन मिलता दिख रहा है।

कई पार्टियों का मिला समर्थन

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ने भी भारत बंद का समर्तन करने का निर्णय लिया है।

क्या है आदिवासियों की मांग

बता दें कि भारत बंद की कई प्रमुख मांगे हैं। इन प्रमुख मांगो में उच्च शिक्षण संस्थानों की नियुक्तियों में 13 प्वाइंट रोस्टर की जगह 200 प्वाइंट रोस्टर लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा शैक्षणिक व सामाजिक रूप से भेदभाव, वंचना व बहिष्करण का सामना नहीं करने वाले सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रद्द करने, आरक्षण की अवधारणा बदलकर संविधान पर हमले बंद करने, देश भर में 24 लाख खाली पदों को भरने, लगभग 20 लाख आदिवासी परिवारों को वनभूमि से बेदखल करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पूरी तरह निरस्त करने के लिए अध्यादेश लाने, पिछले साल 2 अप्रैल के भारत बंद के दौरान बंद समर्थकों पर दर्ज मुकदमे व रासुका हटा कर उन्हें रिहा करने आदि मांगें शामिल हैं।

SC के फैसले से किसको खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के 13 बिंदु रोस्टर सिस्टम से संबंधी पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है जिसके बाद अब दिल्ली के कॉलेजों में गेस्ट टीचर्स की नौकरियां जाने का ख़तरा बढ़ गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के एससी, एसटी, ओबीसी फोरम का कहना है कि इसे लेकर "डर और आशंका का माहौल है" और यदि 200 प्वाइंट का रोस्टर लगू नहीं किया जाता तो इससे एससी, एसटी और ओबीसी टीचरों की नियुक्ति पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।


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