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अटलजी की प्रार्थना सभा में भावुक हुए आडवाणी, पढ़ें संघ प्रमुख और PM ने क्या कहा?

icon कुलदीप सिंह | 0
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| अगस्त 20 , 2018 , 19:56 IST

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आज प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्र सरकार के तमाम मंत्री और विपक्ष दलों के नेता भी मौजूद रहे। सभा में अटल जी को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दस साल तक जो महापुरुष किसी राजनीतिक मंच पर नजर नहीं आए उस व्यक्ति की विदाई को जिस प्रकार देश ने सम्मान दिया शायद ही कोई ऐसी घटना की कल्पना कर सकता है।

श्रद्धांजलि सभा में बोलते हुए पूर्व उपप्रधानमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भावुक हो गए। उन्होंने भारी मन से अटलजी के साथ अपनी 65 साल पुरानी दोस्ती को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उन्हें ऐसी किसी सभा को संबोधित करना पड़ेगा। श्रद्धांजलि सभा में आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी अटलजी को याद किया और उनके बताए रास्तों पर चलने का संकल्प लिया। सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद समेत तमाम हस्तियों ने अटलजी को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

श्रद्धांजलि सभा में भावुक हुए आडवाणी

अटलजी की श्रद्धांजलि सभा में उनके अजीज दोस्त लालकृष्ण आडवाणी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि जब मेरी आत्मकथा का विमोचन हुआ तो अटलजी उपस्थित नहीं हो पाए थे, जिसका उन्हें बहुत कष्ट हुआ और आज जब वह नहीं हैं तो कितना कष्ट हो रहा है, यह समझा जा सकता है। मैं जब आज जैसी सभा कह रहा हूं तो मुझे इसका पहला-पहला लक्षण यही नजर आता है कि ऐसी सभा जिसमें अटलजी उपस्थित न हों, ऐसी सभा को संबोधित करना पड़ेगा।न वह कभी-कभी कहते थे कि मैं कितने दिन रहूंगा। जब वह ऐसी बातें करते थे तो मन में तकलीफ होती थी।'

'...तब भी कष्ट हुआ था और आज तो खुद अटलजी नहीं'

आडवाणी ने आगे कहा, 'मैंने जब पुस्तक लिखी थी, अपने जीवन की आत्मकथा की, उसमें अटलजी का उल्लेख था लेकिन जब विमोचन हुआ और अटलजी नहीं आए तो मुझे बहुत तकलीफ हुई। पुस्तक का प्रकाशन भी हुआ लेकिन जब विमोचन हुआ तो अटलजी उपस्थित नहीं थे। मेरे मन में कष्ट हुआ था। आज स्वयं अटलजी उपस्थित नहीं हैं और ऐसी सभा हो रही है जिसमें सिर्फ अटलजी को चाहने वाले कार्यकर्ता नहीं हैं बल्कि विभिन्न पार्टियों के नेता यहां उपस्थित हैं जिनका जनसंघ, बीजेपी या संघ से रिश्ता नहीं है। इसकी मुझे बहुत खुशी है।'

'खुद भोजन पकाकर मुझे खिलाते थे'

अटलजी के साथ अपनी साढ़े 6 दशकों लंबी दोस्ती का जिक्र करते हुए आडवाणी ने कहा, 'मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मेरी अटलजी से मित्रता 65 साल की थी। मैंने अटलजी के साथ मिलकर बहुत सारे अनुभव किए, साथ-साथ काम किए, पुस्तकें पढ़ते थे। अटल जी के परिचय के बाद लोग भी जानेगा कि अटलजी की विशेषताओं में एक यह थी कि भोजन अच्छा बना सकते थे। अटलजी ही भोजन पकाकर मुझे खिलाते थे।'

'अटलजी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया'

आडवाणी ने कहा, 'हमने अटलजी से बहुत कुछ सीखा, बहुत कुछ पाया अटलजी से और इसीलिए दुख होता है कि वह हमको छोड़ करके हमसे अलग हो गए। लेकिन इतना ही कह सकता हूं कि अटलजी ने जो कुछ भी हमको सिखाया, दिया उसे ग्रहण करके हम जीवन बिताएं। जो संस्कार हमें आरएसएस से मिला, उन संस्कारों को कार्यान्वित करके हमें संतोष होगा। मेरी विनम्र श्रद्धांजलि अटलजी को और उनके बताए मार्ग पर मैं जीवनभर चल सकूं, यह शक्ति हमें भगवान दें।'

अटल जी ने विशाल वृक्ष तैयार किया: भागवत

अटलजी को श्रद्धांजलि देते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि उन्होंने जड़ों को सींचसींचकर एक विशाल वृक्ष तैयार किया। वही आगे उन्होंने कहा कि सुंदर पुष्पों और मधुर फलों से एक बड़ा वृक्ष सुसज्जित होता है, उसके पत्ते भी औषधि है, औषधि के लिए लोग पत्ते ले जाते हैं, सुगंध के लिए फूलों को ले जाते हैं, स्वादिष्ट फलों को ले जाते हैं...कितने लोगों के मन में यह विचार आता है कि अभी यह वृक्ष छाया समेत तमाम चीजें दे रहा है, वह कभी छोटा पौधा था तो उसकी रक्षा करते हुए उसकी जड़ों को किसने सींचा होगा। अटलजी ने भी ऐसा ही वृक्ष तैयार किया।

भागवत ने कहा, 'मेरा अटलजी से बहुत ज्यादा संपर्क नहीं रहा। लेकिन वह हमारे ईर्द-गिर्द ही हैं और रहेंगे। कविताओं, भाषणों, जीवन के किस्सों के रूप में हमेशा मौजूद रहेंगे। पहले भी थे, आज भी हैं और सदा रहेंगे।

जीवन कितना लंबा हो यह हमारे हाथ में नहीं है

वही पीएम सहित देश के विभिन्न नेताओं ने भी उनके बारे में अपनी बातों को सबो के सामने रखा। प्रार्थन सभा में पीएम मोदी ने कहा कि 11 मई को परमाणु परीक्षण अटल जी की दृढ़ता की वजह से हुआ। उसके बाद दुनिया ने भारत पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन ये अटल थे जो 11 मई को परीक्षण के बाद 13 मई को एक बार फिर दुनिया को चुनौती देते हुए भारत की ताकत का अहसास कराया। जीवन कितना लंबा हो यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन जीवन कैसा हो, ये हमारे हाथ में है और अटल जी ने जी करके दिखाया कि जीवन कैसा हो, क्यों हो, किसके लिए हो और कैसे हो। अटल जी नाम से ही अटल नहीं थे उनके व्यवहार में भी अटल भाव नजर आता है।

 

नेहरू ने 35 साल के अटल में भावी प्रधानमंत्री देख लिया

वही गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम बनने के बाद अटल जी सबको साथ लेकर चले। अटल जी को जानने वाल हर व्यक्ति उनसे प्रभावित है। अटल जी को याद करते हुए राजनाथ ने कहा कि पंडित नेहरू ने 35 साल के अटल में भावी प्रधानमंत्री देख लिया था।


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कुलदीप सिंह

Executive Editor - News World India. Follow me on twitter - @KuldeepSingBais

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