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3 तलाक बिल राज्यसभा में अटका, कांग्रेस ने कहा- सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 3 , 2018 , 16:23 IST

एक बार में तीन तलाक को अपराध करार देने वाला बिल राज्यसभा में कांग्रेस के हंगामे के बाद अटक गया। इस पर सदन में चर्चा हो रही थ, मगर हंगामे के बाद राज्यसभा की कार्रवाई स्थगित कर दी गई। 

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल को लोकसभा पिछले हफ्ते ही पास कर चुकी है। बिल को लेकर CPI, CPIM, DMK, AIADMK, BJD, AIADMK और सपा ने राज्यसभा के सभापति के साथ मुलाकात की। इन पार्टियों ने बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने की मांग की है। उधर, यूनियन मिनिस्टर मुख्तार अब्बास नकवी ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस ट्रिपल तलाक बिल पर कन्फ्यूज है।

सरकार ने क्या कहा

पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्टर अनंत कुमार ने कहा- हम ट्रिपल तलाक बिल पर कांग्रेस और बाकी दूसरी पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं। उम्मीद करते हैं कि राज्यसभा में इसे पास कराने में दिक्कत नहीं होगी।

सीपीआई और डीएमके का रुख एक जैसा

सीपीआई सांसद डी. राजा ने कहा- यह आज के लिए लिस्टेड था। जहां तक लेफ्ट पार्टियों का संबंध है, हमारी मांग है कि इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा- इसे सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए।

शरद पवार की पार्टी एनसीपी ने भी बिल को राज्यसभा की सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की है। पार्टी सांसद माजिद मेमन ने यह मांग रखी।

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कांग्रेस ने नहीं लिया फैसला

कांग्रेस ट्रिपल तलाक बिल पर अब तक फैसला नहीं ले पाई है। वो दूसरी पार्टियों से बात कर रही है। गुलाम नबी आजाद ने कुछ विपक्षी नेताओं से चर्चा की है। माना जा रहा है कि कांग्रेस इसमें हर्जाने के प्रावधान समेत और बदलावों की मांग कर सकती है।

कांग्रेस कन्फ्यूज है: नकवी

यूनियन मिनिस्टर मुख्तार अब्बास नकवी ने ट्रिपल तलाक बिल के मसले पर कहा कि कांग्रेस इसे लेकर कन्फ्यूज है। नकवी ने कहा- मुस्लिम महिलाएं इस बिल को लेकर खुश हैं तो फिर कांग्रेस दुखी क्यों है? कांग्रेस एक कदम आगे जाती और फिर 10 कदम पीछे हट जाती है।

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राज्यसभा में सरकार क्यों मजबूर

फिलहाल, राज्यसभा में एनडीए और कांग्रेस दोनों के ही पास 57-57 सीटें हैं। सरकार के सामने दिक्कत ये है कि बीजू जनता दल और एआईएडीएमके जैसी पार्टियां इस सदन में मोदी सरकार की मदद करती रही हैं, लेकिन ट्रिपल तलाक बिल का विरोध कर रही हैं।

ऐसे में, अगर यह बिल स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाता है तो इसका मतलब यह हुआ कि सरकार इसे विंटर सेशन में पारित नहीं करवा पाएगी। यह सेशन इस हफ्ते के आखिर में खत्म हो जाएगा। यह बिल कानून बने, इसके लिए दोनों सदनों से इसका पास होना जरूरी है

राज्यसभा में कांग्रेस बीजेपी से आगे

इंडिपेंडेंट और नॉमिनेटेड मेंबर्स को छोड़ दें तो राज्यसभा में 28 पार्टियों के मेंबर्स हैं। तृणमूल कांग्रेस के 12, समाजवादी पार्टी के 18, तमिलनाडु की एआईएडीएमके के पास 13, सीपीएम के 7, सीपीआईए के 1, डीएमके के 4, एनसीपी के 5, पीडीपी के 2, हरियाणा के इंडियन नेशनल लोकदल के 1, शिवसेना के 3, तेलगुदेशम के 6, टीआरएस के 3, वाएसआर के 1, अकाली दल के 3, आरजेडी के 3, आरपीआई के 1, जनता दल (एस) के 1, केरल कांग्रेस के 1, नगा पीपुल्स फ्रंट के 1 और एसडीएफ का 1 सांसद हैं।
इनके अलावा 8 नॉमिनेटेड और 6 इंडिपेंडेंट मेंबर भी राज्यसभा में हैं। बीजेपी के मिलाकर एनडीए के कुल 88 सांसद हो रहे हैं। यह बिल पास कराने के आंकड़े से 35 कम है।

जुलाई में बीजेपी के पास होगा राज्यसभा में बहुमत

नए साल में बीजेपी और एनडीए राज्यसभा में भी बहुमत में होंगे। राज्यसभा की कुल 245 में से 67 सीटें बीजेपी के पास होंगी और वो इस सदन में सबसे बड़ी पार्टी हो जाएगी। अगर एनडीए की बात करें तो कुल 98 सीट्स उसके पास होंगी। हालांकि, ये बहुमत जुलाई में ही हासिल हो पाएगा। जुलाई में कांग्रेस के पास और उसके सहयोगियों के पास 72 से घटकर 63 सीटें रह जाएंगी। बीजेपी की सीटें इसलिए बढ़ेंगी, क्योंकि उसने यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड और उत्तराखंड के चुनाव जीते हैं। इन राज्यों की सीटों का फायदा उसे मिलेगा। कांग्रेस की सीटें 57 से 48 हो जाएंगी।


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