राजनीति

त्रिपुरा में BJP को इस शख्स की वजह से मिली सत्ता! कौन है नया 'चाणक्य' सुनील देवधर

अमितेष युवराज सिंह | न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 3 , 2018 , 19:12 IST

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी को अप्रत्याशित जीत मिली है। इस जीत के बाद बीजेपी का कहना है कि उसका जनाधार देश के सभी राज्यों और प्रांतों में हो गया है। वैसे तो इस जीत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बीजेपी के हजारों-लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत छुपी हुई है लेकिन एक शख्स है जिसके बिना ये फतह मुमकिन ना हो पाती। इस शख्स का नाम है सुनील देवधर।

कभी चुनाव मैदान में नहीं उतरने वाले सुनील देवधर ने इस बेहतरीन प्रदर्शन का खाका खींचा था। उनकी कोशिश और बेहतरीन प्लानिंग का ही परिणाम है कि आज त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार बन रही है।

कौन हैं सुनील देवधर

सुनील देवधर लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे हैं और वे बांग्‍ला भाषा भी जानते हैं। वह महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। भाजपा आलाकमान ने देवधर को नॉर्थ ईस्ट की जिम्मेदारी सौंपी थी। यहां रहते हुए उन्होंने स्थानीय भाषाएं सीखीं जिससे कि वो यहां की जनता से सीधे जुड़ सकें क्‍योंकि राज्‍य की 31 फीसदी आबादी यही हैं। मेघालय, त्रिपुरा, नगालैंड में खासी और गारो जैसी जनजाति के लोगों से वे उनकी ही भाषा में बात करते हैं।

बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने सुनील देवधर को नवंबर 2014 में त्रिपुरा का प्रभारी बनाया था। तब से ही वे इस मिशन में लगे हुए हैं। 1985 में सुनील देवधर राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ में शमिल हुए और अब असंभव सी लगने वाली जीत भी बीजेपी के सिर पर ताज के रूप में सजा दी।

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त्रिपुरा में कैसे किया काम

सुनील देवधर जब त्रिपुरा पहुंचे थे उस वक्‍त वहां बीजेपी के लिए कुछ नहीं था। हर काम की शुरुआत जड़ से करनी थी। देवधर के अनुसार, बस मुट्ठीभर कार्यकर्ता और एकमात्र नेता सुबल भौमिक के साथ आए थे। प्रभारी नियुक्‍त किए जाने के बाद उन्‍होंने महीने के 15 दिन यहीं बिताने शुरू किए। राज्‍य के कोने-कोने का दौरा किया। उन्‍होंने बताया, ‘हमने यहां की स्‍थानीय समस्‍याओं से काम शुरू किया जैसे पानी की कमी, बिजली, सड़क, चिकित्‍सकों का अभाव, स्‍कूल में शिक्षक आदि। इससे हमें स्‍थानीय लोगों का समर्थन हासिल हुआ।‘

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'मोदी लाओ' की जगह 'माणिक हटाओ'

इससे पहले देवधर ने वाराणसी और उत्तर प्रदेश में बीजेपी को जीत दिलाया जिसके बाद नॉर्थ ईस्ट भी उनके हाथों में सौंप दिया गया था। विधानसभा के चुनावों से ठीक पहले कई दलों के नेता और विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया था। त्रिपुरा में वाम दलों, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस में सेंध मारने का काम भी देवधर ने ही किया। यही नहीं, उन्होंने ही 'मोदी लाओ' की जगह 'सीपीएम हटाओ', 'माणिक हटाओ' जैसे नारों को बुलंद किया।


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