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पाकिस्तान को नहीं मिलेगी 225 मिलियन डॉलर की अमेरिकी सैन्य मदद, ये है वजह

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 2 , 2018 , 14:27 IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्टीट के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 1626 रोड़ रुपए की मदद रोक दी। उन्होंने कहा कि 15 साल से पाकिस्तान अमेरिका को बेवकूफ बना रहा है और 2.14 लाख करोड़ रुपए ले चुका है।

 

इन वजहों से अमेरिका ने रोकी पाकिस्तान को आर्थिक मदद

1. अमेरिकी मदद से पलता था आतंकवाद 

‘‘दो इंटरनेशनल जर्नलिस्ट लेवी एंड कैथरीन स्कॉट की किताब ‘डिसेप्शन: पाकिस्तान, द यूनाइटेड स्टेट्स एंड द सीक्रेट ट्रेड इन न्यूक्लियर वेपन्स’ में इस बात का जिक्र है कि पाकिस्तान कैसे अमेरिका से मिलने वाली मदद को आतंकियों की मदद में खर्च कर देता था। लेकिन अमेरिका ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया। उसने आज तक पाकिस्तान को टेरर स्टेट घोषित नहीं किया।’’

 ‘‘हाफिज सईद भारत के खिलाफ क्या करता है और उसने कैसे मुंबई हमलों की साजिश रची, यह अमेरिका को अच्छी तरह पता था। इसके बावजूद उसने बहुत देरी से इन आतंकियों के खिलाफ कड़ा स्टैंड लिया। नतीजा यह रहा कि तब तक ये आतंकी पाकिस्तानी सरकार और फौज से आर्थिक मदद लेते रहे।’’

2. चीन से ज्यादा नजदीकी का पाकिस्तान को हुआ नुकसान
‘‘पाकिस्तान आज पूरी तरह से चीन के पाले में है। डेवलपमेंट के नाम पर मदद की वजह से वह चीन के कर्ज में डूबा है। चीन से उसकी बॉर्डर सटी है। भारत के खिलाफ ताकत बढ़ाने में भी चीन उसकी मदद करता है। लिहाजा, पाकिस्तान चीन से दूरी नहीं बढ़ा सकता।’’
‘‘पहले ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन और अब ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन का यह मानना था कि बड़ा दिल दिखाकर पाकिस्तान को चीन से दूर कर अपनी तरफ खींचा जा सकता है। लेकिन चीन ने ऐसा नहीं होने दिया। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन की नाराजगी की यह एक बड़ी वजह है।’’

3. रूस का पाक-चीन की मदद करना अमेरिका को पसंद नहीं आया


 ‘‘पाकिस्तान ने चीन के साथ-साथ रूस से भी आर्थिक रिश्ते बेहतर किए हैं। ऐसा नहीं है कि रूस सीधे तौर पर भारत के खिलाफ हो गया है, लेकिन अब रूस को पाकिस्तान के अंदर चीन के साथ मिलकर डेवलपमेंट करने में अपना आर्थिक फायदा ज्यादा नजर आ रहा है। अमेरिका की चिंता का यह एक और कारण है। यही वजह है कि अमेरिका भारत के खुलकर सपोर्ट में है और पाकिस्तान के खिलाफ उसने यह एक्शन लिया है।’’

अमेरिका से 2.14 लाख करोड़ ले चुका है पाकिस्तान


पाकिस्तान ने बीते 15 साल में आतंकवाद से निपटने और आर्थिक जरूरतों के नाम पर अमेरिका से 33 अरब डाॅलर यानी 2.14 लाख करोड़ रुपए झटक लिए। लेकिन ज्यादातर मदद का भारत के खिलाफ ताकत बढ़ाने में और सरकारी खर्चे निकालने में इस्तेमाल किया। 2014 में इसका उदाहरण सामने आया था जब पाकिस्तान ने अमेरिका से मिले 50 करोड़ रुपए सरकारी बिलों के पेमेंट और विदेशी मेहमानों को तोहफे देने में खर्च कर दिए।  यह भी आरोप लगता रहा है कि तालिबान के खिलाफ लड़ाई के लिए अमेरिका से मिले पैसे का इस्तेमाल पाकिस्तान कश्मीर में आतंक को बढ़ावा देने में भी करता है।

पहले भी पाकिस्तान को रुपयों की मदद रोक चुका है अमेरिका 

इससे पहले 1965 से 1980 के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद रोक दी थी। 1981 के आसपास अफगानिस्तान में जब सोवियत रूस ने अपना मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया तो अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली मिलिट्री मदद शुरू की। 
इसके बाद 1990 के बाद अमेरिका को शक हुआ कि पाकिस्तान न्यूक्लियर पावर बढ़ाने की कोशिश में है। लिहाजा, 1993 से मदद फिर रोक दी गई। 
1998 में भारत ने पोखरण में न्यूक्लियर टेस्ट किया। जवाब में पाकिस्तान ने भी टेस्ट किया। इसके नतीजतन अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सभी तरह की मदद पर रोक लगा दी।पाक को यूएस से मिलने वाली मदद में अहम मोड़ तब आया जब अमेरिका में 9/11 आतंकी हमला हुआ। इसके बाद 2004 तक अमेरिकी मदद का आंकड़ा बढ़कर 1 अरब डॉलर हो गया।
2009 में अमेरिका-पाकिस्तान के बीच केरी-लुगर-बर्मन एक्ट करार हुआ। इसके तहत 2010 से 2014 तक पाकिस्तान को अमेरिकी मदद तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ाकर 7.5 अरब डॉलर कर दी गई।
अमेरिका से पाकिस्तान को जो भी मदद मिली, उसका 70% हिस्सा मिलिट्री या सिक्युरिटी से जुड़े मसलों के लिए था।


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