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PRC मुद्दा बना अरुणाचल प्रदेश में हिंसा की वजह, जानें क्या है 'पीआरसी'

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| फरवरी 25 , 2019 , 12:45 IST

अरुणाचल प्रदेश में स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (पीआरसी) देने को लेकर हिंसा और विरोध हो रहा है। PRC में राज्य सरकार ने छह समुदायों को स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र (PRC) दिए जाने की सिफारिश की है। इस सिफारिश पर स्थानीय लोग आगबबूला हैं। इस हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई है और राजधानी ईटानगर में उपमुख्यमंत्री चोवना मेन के घर को आग लगा दी गई और डिप्टी कमिश्नर का ऑफिस तोड़ दिया गया।

मामले पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू का कहना है कि उन्होंने जांच के आदेश दे दिए हैं। पीआरसी पर सरकार का रुख स्पष्ट है लेकिन फिर भी हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। आयुक्त स्तर की एक जांच समिती बनाई है। जनता के सामने सच आना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि हमें महसूस हो रहा है कि इन घटनाओं के पीछे किसी का हाथ है। अन्यथा अरुणचल प्रदेश एक शांतिपूर्व राज्य है।

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प्रदर्शनकारियों ने उपमुख्यमंत्री चौना मेन के घर को भी फूंक दिया है। लोगों में राज्य सरकार के खिलाफ काफी गुस्सा है। चौना मेन को रविवार सुबह राज्य की राजधानी ईटीनगर से नामसाईं जिले में भेज दिया गया। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने जिला आयुक्त के आवास पर भी आगजनी और तोड़फोड़ की।

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केन्द्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों को भेजा-:

माहौल को तनाव पूर्ण देखने के बाद केंद्र सरकार ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन की मदद करने के लिए राज्य में 1,000 अर्धसैनिक बलों को भेजा है। इसके बाद ईटानगर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू भी लागू कर दिया। हिंसा ना बढ़े इसके लिए सेना ने ईटानगर और नहरगांव में फ्लैग मार्च भी निकाला।

क्या है..? स्थायी निवासी प्रमाणपत्र(PRC)-:

स्थायी निवास प्रमाण-पत्र एक कानूनी दस्तावेज है। जो भारतीय नागरिकों को दिया जाता है। ये उनके नागरिक होने का एक सबूत होता है। इसे आवासीय प्रमाण के रूप में आधिकारिक उद्देश्य के लिए भी प्रस्तुत किया जाता है।

क्यों हो रहा है राज्य सरकार का विरोध-:

भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने छह गैर-अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजाति (APST) के समुदायों को PRC देने का प्रस्ताव रखा था। राज्य सरकार में मंत्री नाबाम रेबिया के नेतृत्व में एक जॉइंट हाई पावर कमेटी (JHPC) ने विभिन्न लोगों से बात करके छह समुदायों को स्थायी निवास प्रमाण-पत्र देने का प्रस्ताव पेश किया जो अरुणाचल के स्थायी निवासी नहीं हैं, लेकिन नामसाई और चांगलांग के जिलों में दशकों से रह रहे हैं।

अरुणाचल प्रदेश के कई समुदायों के संगठन राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर गुस्सा हैं। स्थानीय लोगों को लगता है कि इनको स्थायी निवास प्रमाण-पत्र मिलने से उनके अधिकारों और हितों के साथ समझौता होगा।


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