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एवरेस्ट विजेता अरुणिमा के छलके आंसू, कहा - महाकाल मंदिर में मेरी दिव्यांगता का बना मजाक

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| दिसंबर 26 , 2017 , 11:21 IST

माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली विश्व की पहली दिव्यांग अरुणिमा सिन्हा ने उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें एवरेस्ट पर चढ़ने में इतनी दिक्कत नहीं आई, जितना महाकाल मंदिर के दर्शन करने में आई। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पीएमओ और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को ट्वीट किया।

अरुणिमा ने बताया कि मध्य प्रदेश महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री अर्चना चिटनिस के बुलावे पर युवाओं के एक सम्मलेन को संबोधित करने के लिए 23 दिसम्बर को बुरहानपुर गई थीं। इस दौरान थोड़ा वक़्त निकाल कर वह अगले दिन सुबह 4.30 बजे उज्‍जैन के महाकाल मंदिर दर्शन के लिए गईं। चूंकि वो मंत्री कि मेहमान थीं, लिहाज़ा मंदिर प्रशासन को अरुणिमा के आने के बारे में पहले ही बता दिया गया था।

अरुणिमा के मुताबिक, रविवार को मैं 4.30 बजे उज्जैन के महाकाल मंदिर दर्शन के लिए पहुंची थीं। मुझे यहां मंदिर समिति के कर्मचारियों ने पहले तो एलईडी स्क्रीन के पास बैठा दिया। फिर बाद में मुझे कहा कि खुद गर्भगृह में चले जाओ। मैं खुद नहीं जा सकती थी, इसलिए दोनों सहयोगियों को साथ ले जाने के आग्रह कर रही थी।’’

जब अरुणिमा मंदिर के अंदर जाने लगीं तो मंदिर के कर्मचारियों ने उन्हें यह कह कर रोक दिया कि वो लोअर, टी-शर्ट और जैकेट पहन कर मंदिर के अंदर नहीं जा सकतीं। अरुणिमा बताती हैं कि हालांकि वहां मंदिर के अंदर जाने के लिए किसी ड्रेस कोड को बारे में मंदिर में उन्हें कुछ भी लिखा हुआ नहीं दिखा।

बार-बार अपना परिचय और दिव्यांग होने की बात कहने के बाद भी मुझसे मंदिर कर्मचारी बहस करने लगे। फिर जैसे-तैसे मैं नंदीगृह तक पहुंची। यहां की व्यवस्था से मैं इतनी तंग हो गई कि बाहर निकलते समय मेरी आंखों से आंसू छलक पड़े थे।

अरुणिमा ने पीएमओ और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ट्वीट किया कि, "मुझे ये बताते हुए बहुत दुःख है की मुझे एवरेस्ट जाने में इतना दुःख नहीं हुआ जीतना मुझे महाकाल मंदिर उज्जैन में हुआ। वहां मेरी दिव्यंगता का मज़ाक़ बनाया गया।"

उन्होंने कहा, इस मंदिर के सुरक्षा कर्मचारियों एवं मंदिर प्रशासन ने मेरी दिव्यंगता का मज़ाक बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मंदिर कर्मचारियों ने उन्हें कहा, भस्मारती को एलसीडी में देख लो। बाद में मुझको कहा कि खुद गर्भगृह में चले जाओ। मैं खुद नहीं जा सकती थी, इसलिए दोनों सहयोगियों को साथ ले जाने के आग्रह कर रही थी।

इस बीच, महाकाल मंदिर प्रशासक अवधेश शर्मा ने बताया कि इस घटना का हमें मीडिया में आई रिपोर्ट से पता चला है। इस संबंध में अरुणिमा ने न तो पुलिस में और न ही मंदिर प्रशासन में शिकायत दर्ज की है।

शर्मा ने कहा कि मंदिर में दर्शन के लिए विकलांगों के लिए रैंप बना हुआ है। जिन-जिन लोगों के पास अनुमति रहती है, उन्हें मंदिर में अंदर जाने दिया जाता है। जिन-जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अरुणिमा को रोका है, उन्हें पूछेंगे कि उन्होंने उन्हें क्यों रोका।

उन्होंने कहा, हम सीसीटीवी के फुटेज भी देख रहे हैं, ताकि पता चले कि पुलिस एवं हमारे कार्यकर्ताओं से चूक कहां हुई।

अरुणिमा के साथ हुए व्यवहार की जानकारी पर महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने कहा- अरुणिमा देश की बेटी हैं। मेरी मेहमान थी। हमें उन पर गर्व है। इस मामले में महाकाल मंदिर प्रशासन से बात करूंगी। उन्हें दोबारा इनवाइट करने लखनऊ जाऊंगी।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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