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3 तलाक बिल: जानें मुस्लिम महिलाओं को कितनी मिली है ताकत, क्या कहता है कानून

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 19 , 2018 , 14:17 IST

केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में लटके तीन तलाक बिल को कानूनी रूप देने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक बिल के अहम पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि इस बिल से मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ मिलेगा।

जानिए तीन तलाक कानून में मुस्लिम महिलाओं को क्या पावर दी गई है

कब दर्ज होगा 3 तलाक का केस

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह अपराध संज्ञेय (पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है) तभी होगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी या फिर खून के रिश्तेदारी या शादी में शामिल रिश्तेदार करेंगे। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस नहीं कर सकता है।

समझौते कि लिए क्या है शर्त

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए है। कानून में समझौते के विकल्प को भी रखा गया है। पत्नी की पहल पर समझौता हो सकता है, लेकिन मैजिस्ट्रेट के द्वारा उचित शर्तों के साथ।

बेल के लिए क्या है शर्त

कानून के तहत मैजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है, लेकिन पत्नी का पक्ष सुनने के बाद। केंद्रीय मंत्री ने कहा, यह पति-पत्नी के बीच का निजी मामला है। पत्नी ने गुहार लगाई है, इसलिए उसका पक्ष सुना जाना जरूरी है।

गुजारे के लिए क्या है प्रावधान

छोटे बच्चों की कस्टडी मां को मिलेगी। पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण का अधिकार मैजिस्ट्रेट तय करेंगे जिसे पति को देना होगा।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने तीन तलाक को निरस्त किया था। दो जजों ने इसे असंवैधानिक कहा था, एक जज ने पाप बताया था। इसके बाद दो जजों ने इस पर संसद को कानून बनाने को कहा था।

तीन तलाक के आंकड़े

जनवरी 2017 से 13 सितंबर 2018 तक 430 तीन तलाक की घटनाएं मिली हैं। इनमें से 229 सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से पहले के हैं, जबकि 201 जजमेंट के बाद के हैं। 3 तलाक के सबसे ज्यादा मामले यूपी में आए। यूपी में जनवरी 17 से पहले 126 केस आए। फैसले के बाद 120 केस हुए।


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