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2+2 वार्ता: सुषमा स्वराज ने US मंत्रियों के सामने पाकिस्तान को सुनाई खरीखोटी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 6 , 2018 , 15:51 IST

भारत और अमेरिका के बीच पहली 2+2 द्विपक्षीय वार्ता का आयोजन हुआ। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। इस मुलाकात में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने समकक्ष अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो, रक्षामंत्री जेम्स पैटिस से बातचीत की।

ऐतिहासिक '2+2' वार्ता में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, आपसी सुरक्षा, व्यापार समेत तमाम मसलों पर चर्चा हुई। दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर वार्ता को रचनात्मक बताया। भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराजने अमेरिका द्वारा लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को ग्लोबल टेररिस्ट्स की सूची में डालने का स्वागत किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच अहम सुरक्षा समझौते COMCASA पर दस्तखत हुए। 

टू प्लस टू बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत अमेरिका की अफगान नीति का समर्थन करता है। इसके बाद स्वराज ने भारत और अमेरिका की ज्वाइंट प्रेस स्टेटमेंट में मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एनएसजी में जल्द से जल्द भारत की सदस्यता को लेकर आज बातचीत हुई जिसपर सभी ने सहमति जताई है।

वहीं अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने रक्षा मत्री निर्मला सीतारमण और सुषमा स्वराज को धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने उनकी और रक्षा मंत्री मैटिस की पहली भारत यात्रा में उनका सहयोग किया। ये भारत और अमेरिका के संबंधों का नया युग है। हम रिश्तों को बेहतर बनाने पर जोर दे रहे हैं। पॉम्पियो ने कहा कि भारत और अमेरिका ने आज बेहद महत्वपूर्ण संप्रेक्षण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। 

स्वराज ने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि उन्हें विश्वास है कि वार्ता के परिणाम से दोनों देशों के बीच अप्रयुक्त क्षमता का लाभ उठाने में मदद मिलेगी और साझेदारी के स्तर को और बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के सभी प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।


पहली टू प्लस टू वार्ता के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत और अमेरिका ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के नयी दिल्ली के प्रयासों के लिए काम करने का फैसला लिया।

पोम्पिओ ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्षों को समुद्री क्षेत्र की आजादी सुनिश्चित करनी चाहिए और समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम करना चाहिए। उनका इशारा दक्षिण चीन सागर में चीन के विस्तारवादी रवैये की ओर था। उन्होंने बाजार आधारित अर्थशास्त्र तथा सुशासन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

भारत दौरे से पहले क्या बोले पोम्पिओ

इस बीच भारत के रूसी मिसाइल रक्षा सिस्टम खरीदने और ईरानी तेल का भारत में आयात के मामले पर यूएस सेक्रेट्री पोम्पिओ ने कहा है कि ये मामला जरूर आएगा लेकिन मुझे नहीं लगता है कि हम जो हासिल करना चाहते है उसमें इनपर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'भारत के रूसी मिसाइल रक्षा सिस्टम खरीदने जैसे फैसले इस रिश्ते के लिए जरूरी हैं लेकिन इन रणनैतिक बैठकों के दौरान हमारी इन मामलों पर चर्चा करने की मंशा नहीं है और न ही हम करेंगे।'

'टू प्लस टू वार्ता' की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि अमेरिका इस तरह का साझा विमर्श अभी तक सिर्फ आस्ट्रेलिया और जापान के साथ करता है। इन दोनों देशों को वह अपने रणनीतिक मामलों के लिए बेहद अहम मानता है। सूत्रों के मुताबिक, भारत को सबसे अहम रणनीतिक साझेदार घोषित करने के बाद हाल ही में अमेरिका ने अपने 90 फीसदी रक्षा उपकरणों को भारत को बगैर लाइसेंस देने की घोषणा की है।


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