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यूपी में अब नहीं पड़ेगी सूखे की मार, कृत्रिम बारिश करवाएगी योगी सरकार

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 5 , 2018 , 19:04 IST

उत्तर प्रदेश के सिंचाई मत्री धर्मपाल सिंह का दावा है कि तमिलनाड़ु, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश में भी अब सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कृत्रिम वर्षा कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बड़ी समस्या का समाधान आईआईटी कानपुर ने कर दिया है। अधिकारियों का दावा है कि 5.5 करोड़ रुपये में 1000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कृत्रिम बारिश कराई जा सकेगी। इसकी शुरुआत बुंदेलखंड से की जाएगी। 

बुंदेलखंड से होगी शुरूआत

योगी सरकार ने सूखा प्रभावित जिलों में कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी कर ली है। इसकी तकनीक आईआईटी कानपुर ने विकसित की है। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया, "मानसून खत्म होने के बाद बुंदेलखंड से कृत्रिम बारिश प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी। सरकार ने इस तकनीक को चीन से खरीदने की कोशिश की मगर बात नहीं बनी। हालांकि, शुरुआत में चीन इस तकनीक को 11 करोड़ रुपये में देने को तैयार हो गया था, लेकिन बाद में इनकार कर दिया।"

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IIT कानपुर कर रहा है मदद

सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि इस बड़ी समस्या का समाधान आईआईटी कानपुर ने कर दिया है। 5.5 करोड़ रुपये में 1000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कृत्रिम बारिश कराई जा सकेगी। दरअसल, आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ सरकार के सामने क्लाउड-सीडिंग (कृत्रिम बारिश) तकनीक का प्रजेंटेशन दे चुके हैं। क्लाउड-सीडिंग में प्राकृतिक गैसों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए आईआईटी कानपुर ने हेलीकॉप्टर समेत तमाम उपकरणों की खरीद भी कर ली है। कृत्रिम वर्षा करने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद ली जाएगी।

कैसे होती है कृत्रिम बारिश ?

कृत्रिम बारिश 4-5 चरणों में करवाई जाती है। सबसे पहले रसायनों का प्रयोग करके क्षेत्र की हवा को वायुमंडल के सबसे ऊपरी हिस्से में भेजा जाता है। जो बादलों का रूप ले लेती है। इसमें कैल्शियम आक्साइड, कैल्शियम क्लोराइड और यूरिया का इस्तेमाल होता है। कृत्रिम बादल हवा में मौजूद वाटर वेपर्स (पानी वाष्प) को सोखने लगते हैं। इसमें अमोनियम नाइट्रेट, यूरिया आदि का प्रयोग किया जाता है। इससे बादलों में पानी की मात्रा बढ़ जाती है। इसके बाद कई और रसायनों के इस्तेमाल से कृत्रिम बारिश कराई जाती है। सारा काम एयरक्राफ्ट या ड्रोन से संभव होता है।


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