नेशनल

मुन्ना की हत्या के बाद सवालों के घेरे में यूपी-सिस्टम

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
506
| जुलाई 14 , 2018 , 13:32 IST

उत्तर प्रदेश में बहार है,गुनहगारों के बीच हाहाकार है। औसतन हर दिन 3 एनकाउंटर यह बताने के लिए काफी है कि प्रदेश में मुजरिमों के लिए कोई जगह नहीं लेकिन आज हम आपको बताते हैं कि जगह है और यह जगह फूलप्रूफ है। अब जहां इतने एनकाउंटर हो रहे हैं तो अपराध का ग्राफ भी बढ़ा ही होगा और आप इस सच से तो वाकिफ होंगे कि अपराधी ना केवल जुर्म करतें हैं बल्कि जुर्म करके खुद के लिए संरक्षण भी ढ़ूढ़ लेते है, एक ऐसी जगह जहां कोई खतरा नहीं और ये संरक्षण है जेल। जी हां जेल वो जगह है जहां गुनाहगार अपने गुनाहों की सज़ा पाने के लिए आता है, जहां होता है उनके जुर्मो का हिसाब।

Bagpat jail

लेकिन दबंगई और गुंडागर्दी के लिए क्या अन्दर, क्या बाहर उन्हें तो बस एक ही काम आता है और वो है दहशत फैला कर अपना वर्चस्व बनाये रखना। ऐसी सूरत में सवाल सिर्फ और सिर्फ प्रशासन पर उठता है कि  आखिर वो कौन लोग है जो अपराधियों के सपोर्ट में खड़े रहते है?  जेल आखिर मुजरिमों का शरणार्थी शिविर कैसे बन रहा है? क्या कोई है जो सिस्टम में रह कर सिस्टम के दायरो को तोड़ता हुआ करप्शन में लिप्त है या फिर पूरा सिस्टम ही करप्टेड है?

यूं तो आपने कई फिल्मों में गुंडाराज देखा होगा और साथ ही देखा होगा प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत और इसी फ़ॉर्मूले को भुनाते हुए समय-समय पर ऐसी तमाम तरह की फिल्में बनती आयी है।  यूपी के जेल में भी कुछ फिल्मी स्टाईल में एक घटना को अंजाम दिया गया और ना केवल एक बल्कि बीते दिनों यूपी के जेल में इस तरह की कई घटनाएं प्रशासन को ऐसे ही कई सवालों के घेरे में ला देती है।

रिश्वत, रंगदारी, चाय-पानी जो चाहे नाम दे लिजिए सब करप्शन के ही पृयायवाची है फेंक एंकाउन्टर से लेकर झूठे इल्ज़ामात में फंसाना।  अब तक तो ये सब सिर्फ फिल्मों का हिस्सा था लेकिन शायद ये फिल्मीं सीन्स अब असल ज़िन्दगी में भी देखने को मिल रहे है। क्या शासन, क्या प्रशासन सभी इस दायरे के घेरे में हैं। कहते हैं “पैसा और पावर सब कुछ खरीद सकता है?” ये डायलॉग भले ही फ़िल्मी है लेकिन ये सवाल क्या वाकई फ़िल्मी है?

Munna

पिछले दिनों यूपी के बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई, आपको बता दें कि मुन्ना बजरंगी की, पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत कोर्ट में पेशी होनी थी जिसके लिए उसको रविवार झांसी से बागपत लाया गया था लेकिन इसी दौरान जेल में उसे गोली मार दी गई, वहीं  उसकी पत्नी सीमा सिंह ने केंद्रीय रेलमंत्री मनोज सिन्हा और पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत कई बड़े नेताओं पर उसके पति की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है, करीब 10 दिन पहले भी सीमा ने एसटीएफ पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया था। जेल के अन्दर पेशी से ठीक पहले एक हाई प्रोफाइल मुजरिम की हत्या होती है और जेल प्रशाशन मौन रहता है, जेल के सेल तक हथियार कैसे आये? क्या बागपत में सरकारी मिलीभगत से सबकुछ प्रीप्लांड था? क्या पुलिस भी इसमें मिली हुई थी? ऐसे बहुत सारे सवाल हैं जो रहेंगे। 

बात अब सिर्फ जेल में हुई घटना की ही नहीं रह गई बल्कि और भी कई चीज़े है जो विचाराधीन है मसलन कई फिल्मों में दिखाया गया है कि किस तरह करप्शन के चलते किसी बेगुनाह को सज़ा मिल जाती है और सफेदपोश गुनाहगार खुलेआम घुमते है। 

Curr

हालांकि इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एडीजी जेल ने बागपत जेल के जेलर, डिप्टी जेलर, जेल वॉर्डन और दो सुरक्षाकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है, मामला इतना संजीदा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन क्या ये कार्रवाई सारे सवालों का जवाब है? क्या य़े कार्रवाई भविष्य में ऐसी होने वाली घटनाओं पर पूर्ण विराम लगा पाएगी? 

यह सारे सवाल भविष्य के काल में जवाब की तलाश करेंगे और आम जनता उम्मीद करती है कि योगी सरकार जनता के भरोसे को पूरा करेगी।


कमेंट करें