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पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों की ट्रेनिंग के लिए फंड नहीं देगा अमेरिका

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 11 , 2018 , 13:38 IST

अमेरिकी प्रशासन द्वारा पाकिस्तान को सैन्य प्रशिक्षण के लिए फंड मुहैया नहीं कराए जाने के बाद पाकिस्तान सैन्य अधिकारियों के लिए निर्धारित 66 स्लॉटों को भरने के लिए जूझ रहा है। 'डॉन ऑनलाइन' ने सूत्रों के हवाले से शनिवार को बताया कि पाकिस्तानी अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए फंड अमेरिकी सरकार के अंतर्राष्ट्रीय सैन्य शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम (आईएमईटी) से जारी होता है लेकिन अगले शैक्षणिक वर्ष के लिए पाकिस्तान को धन उपलब्ध नहीं कराया गया है।

डॉन को पहले अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (एनडीयू), वाशिंगटन से फंड रोकने के बारे में पता चला, जो पाकिस्तानी अधिकारियों के लिए एक दशक से अधिक समय तक कोटा आरक्षित करते आया है। एनडीयू कई अमेरिकी सैन्य संस्थानों में से एक है जो पाकिस्तान के अधिकारियों को प्रशिक्षित करता है।

ट्रंप प्रशासन ने इस साल की शुरुआत में घोषणा की थी कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर मतभेदों के चलते वह पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय सहायता रोक रहा है लेकिन संकेत दिया था कि सैन्य अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रहेगा।

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पाकिस्तानी अधिकारियों के लिए निर्धारित स्लॉट को रद्द करने से पता चलता है कि फंड का रोका जाना अब प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी लागू होता है।

यह फैसला 1.15 बिलियन डॉलर (करीब 7 करोड़ 94 लाख रुपए) से आतंकी गतिविधियों को रोकने में पाकिस्तान के विफल होने के बाद किया गया। पेंटागन और पाकिस्तानी सेना ने इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, दोनों देशों के अधिकारी प्रतिक्रिया जरूर व्यक्त कर रहे हैं।  रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से उनकी सेना लीडरशिप ट्रेनिंग के लिए चीन या रूस की तरफ बढ़ सकती है।

आईएमएफ पर भी पाक को झटका


अमेरिका ने कर्ज से परेशान पाकिस्तान को एक और झटका दिया है। 16 अमेरिकी सांसदों के एक द्विपक्षीय समूह ने विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को पत्र लिखकर चीन द्वारा कर्ज लेने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ओर से कर्ज नहीं देने को कहा है। इसमें पाकिस्तान भी शामिल है। पाकिस्तान, श्रीलंका और जिबूती ने चीन से अरबों डॉलर का कर्ज ले रखा है। साथ ही ये देश इन कर्जों को लौटाने में असमर्थ है। इसलिए सांसदों ने यह मांग की है। चीन ने बेल्ट रोड इनिशिएटिव कार्यक्रम के तहत इन देशों को विभिन्न परियोजनाओं के लिए कर्ज दे रखा है।


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