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अमेरिका ने चीन को दिया करारा जवाब, साउथ चाइना सी में शुरू की नौसेना की गश्ती

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 19 , 2017 , 19:09 IST

अमेरिका और चीन के बीच टकराव बढ़ सकता है। दरअसल चीन की चेतावनी के बावजूद अमेरिकी नौसेना के एक विमान वाहक स्ट्राइक ग्रुप ने दक्षिण चीन सागर में गश्त शुरू कर दी है। यह जानकारी अमेरिकी नौसेना के एक आधिकारी ने मीडिया से साझा की है।अमेरिकी नौसेना के अधिकारी ने अपने बयान में कहा कि विमान वाहक स्ट्राइक ग्रुप (सीएसजी)1 ने शनिवार को नियमित गश्त शुरू कर दी है।

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(फोटो साभार - सीएनएन)

क्या है वाहन स्ट्राइक ग्रुप

अमेरिकी विमान वाहक स्ट्राइक ग्रुप कई खतरनाक लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसमें निमित्ज-श्रेणी का विमान वाहक पोत यूएसएस कार्ल विंसन (सीवीएन 70), विध्वंसक स्क्वाड्रन (डेसरॉन)1 का आरले श्रेणी का निर्देशित मिसाइल विध्वसंक यूएसएस वायने ई.मेयर (डीडीजी 108) तथा कैरियर एयर विंग (सीवीडब्ल्यू)2 के विमान शामिल हैं।

दक्षिण चीन सागर में अभियान शुरू करने से पहले स्ट्राइक ग्रुप के पोतों और विमानों ने अपनी तैयारी जारी रखने तथा उसमें सुधार के लिए हवाई तथा गुआम द्वीपों के पास अभ्यास किया है। 

अमेरिकी ने क्यों गश्त शुरू की

दरअसल, चीन ने 15 फरवरी को चेतावनी दी थी कि अमेरिका दक्षिण चीन सागर मामले में दखलअंदाजी ना करे। चीन के विदेश मंत्रालय ने बीजिंग की संप्रभुता को चुनौती देने के खिलाफ अमेरिका को चेतावनी दी थी। लेकिन अमेरिका ने चीन की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए तीन दिन बाद ही दक्षिण चीन सागर में सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

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अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जिस इलाके में अमेरिकी नौसेना गश्त कर रही है, वह विवादित इलाका है। पूर्वी एशिया के कई देश उस क्षेत्र पर अपना दावा लंबे समय से करते रहे हैं, इसके बावजूद चीन उस क्षेत्र को अपना बताता है।

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साउथ चाइना सी विवाद क्या है

साउथ चाइना सी दक्षिणी-पूर्वी एशिया से प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे तक स्थित है। इसमें करीब 1.4 मिलियन स्क्वेयर धरातल है और साथ ही चट्टानों का संग्रह, द्वीप और प्रवाल द्वीप के अलावा छोटे द्वीपों का समूह, पार्सेल द्वीप समूह और स्कारबोरो शोल हैं। साउथ चाइना सी दुनिया का बेहद अहम व्यापार मार्ग है।

इस इलाके से हर साल कम से कम 5 ट्रिलियन डॉलर के कॉमर्शियल गुड्स की आवाजाही होती है। कहा जाता है कि यहां तेल और गैस का विशाल भंडार है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के अनुमान के मुताबिक यहां 11 बिलियन बैरल्स आइल और 190 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस संरक्षित है। यही वजह है कि अमेरिका, चीन को यहां आने से रोकना चाहता है।

दक्षिण चीन सागर पर दावा करने वाले देश

दक्षिण चीन सागर के इस क्षेत्र पर दावा करने वालों में कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम और ताइवान भी उस हिस्से पर अपना दावा ठोकते हैं। 

साउथ चाइना सी के मुद्दे पर चीन कई बार भारत को भी धमकी दे चुका है। ऐसे में अमेरिका के इस कदम से दक्षिण-पूर्वी एशिया ही बल्कि विश्व पटल पर नई हलचल मच सकती है।

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