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चीन को बड़ा झटका, अमेरिका ने भारत को दिया STA-1 का दर्जा, पढ़ें क्या होगा फायदा

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 4 , 2018 , 15:26 IST

एनएसजी में भारत के शामिल करने का विरोध करने वाले चीन को दूसरी बार अमेरिका ने तगड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने भारत को स्ट्रैटजिक ट्रेड ऑथराइजेशन-1 (STA-1) का दर्जा दिया है। यह दर्जा पाने वाला भारत दक्षिण एशिया का पहला और एशिया का तीसरा देश बन गया है। भारत से पहले जापान और दक्षिण कोरिया को यह दर्जा मिल चुका है। अमेरिका ने इसके लिए शुक्रवार को अधिसूचना भी जारी कर दी।

भारत के लिए अब अमेरिका से अत्याधुनिक हथियारों और उनकी प्रौद्योगिकी हासिल करने का रास्ता खुल गया है। साथ ही भारत को प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा भी मिल गया है। इस अधिसूचना के बाद अमेरिका से भारत को ड्रोन विमानों समेत तमाम आधुनिक हथियारों के निर्यात पर से सरकारी नियंत्रण खत्म हो गया है।

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कैसे मिलता है एसटीए-1 का दर्जा

अमेरिका द्वारा किसी भी देश को एसटीए-1 का दर्जा तभी दिया जाता है जब वह चार प्रमुख संगठनों- परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी), मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर), वासेनार व्यवस्था (डब्ल्यूए) और ऑस्ट्रेलिया ग्रुप का सदस्य है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एसटीए-1 का दर्जा पाने की ये शर्त रखी थी।

नियमों में ढील के बाद भारत को मिला यह दर्जा

भारत ने एनएसजी को छोड़कर बाकी तीनों संगठनों की सदस्यता हासिल कर ली थी, लेकिन चीन की वजह से भारत को एनएसजी की सदस्यता नहीं मिल पा रही थी। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत को अपना प्रमुख रक्षा साझेदार मानते हुए नियमों में ढील दी, जिसके बाद भारत को एसटीए-1 का दर्जा मिल गया।

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चीन को तगड़ा झटका

अमेरिका ने भारत को यह दर्जा देकर चीन को एक कड़ा संदेश दिया है। क्योंकि जिस तरह से चीन हमेशा से एनएसजी में शामिल होने की भारत की मांग पर रोड़ा अटकाता रहा है, ऐसे में भारत को मिला यह दर्जा उसके मुंह पर जोरदार तमाचे की तरह है। अब भारत को वहीं सारी सुविधाएं मिलेंगी, जो किसी एनएसजी में शामिल किसी देश को मिलती हैं। भारत को एसटीए -1 का दर्जा देकर अमेरिका ने यह स्वीकार किया है कि सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के निर्यात नियंत्रण शासन का पालन करता है। यह दर्जा पाने वाला भारत अब दुनिया का एकमात्र परमाणु संपन्न देश बन गया है। विशेषज्ञ मान रहे हैं इस स्टे टस के मिलने के बाद भारत की एनएसजी में एंट्री की राह खुल सकती है। अमेरिका ने यह स्टेयटस अभी तक सिर्फ अपने सबसे करीबी देशों को दिया है।

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एसटीए स्टे्टस से भारत को क्या फायदा?

दरअसल, सामरिक व्यापार प्राधिकरण अमेरिका से बिना किसी लाइसेंस के अत्याधुनिक और संवेदनशील हथियारों के निर्यात की अनुमति देता है और भारत के लिए यह दर्जा बहुत फायदेमंद साबित है। दुनिया में कुल 36 देश ही इस सूची में शामिल हैं, जिनमें से अधिकतर नाटो समूह के सदस्य हैं। इससे भारत अब आसानी से अमेरिका से संवेदनशील हथियारों को खरीद पाएगा। इससे न केवल दोनों देशों के बीच पारस्परिकता की वृद्धि होगा बल्कि लाइसेंसों की स्वीकृति में जो समय बर्बाद होते थे, उनकी भी बचत होगी। साथ ही इससे रक्षा उपकरणों की जरुरत भी काफी कम कीमत पर पूरी की जा सकेंगी।

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रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा?

माना जा रहा है कि अमेरिका के इस फैसले से आने वाले दिनों में भारत के रक्षा क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की तरफ से अरबों डॉलर के नए निवेश का भी रास्ता खुलेगा। विशेषज्ञों की मानें तो भारतीय और अमेरिकी रक्षा कंपनियों के बीच तेजी से गठबंधन होने के आसार हैं।

हालांकि अमेरिका भारत को अपने हथियारों के बाजार के तौर पर नहीं देखता, लेकिन उसकी रणनीति भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण का ढांचा तैयार करने की है। इससे अमेरिकी हथियार निर्माता कंपनियों के बीच भारत में निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए उत्साह बढ़ेगा। चूंकि अमेरिका में हथियारों के निर्माण में लागत ज्यादा होती है, लेकिन भारत में ये समस्या नहीं है। यहां आसानी से निर्माण इकाईयां स्थापित की जा सकती हैं और उच्च तकनीकी वाले उपकरणों का दूसरे देशों में भी निर्यात किया जा सकता है। यह 'मेक इन इंडिया' के तहत एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।

 


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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