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चीन को घेरने की तैयारी, भारत और जापान के साथ मिलकर 'कूटनीतिक चतुर्भुज' बना रहा US

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 29 , 2017 , 14:58 IST

बीते दिनों चीन के राष्ट्रपति के तौर पर अपनी दूसरी पारी शुरू करने वाले शी चिनफिंग के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यूएस ने बड़ी योजना बनाई है। चीन की तरफ से नेपाल, श्री लंका, बांग्लादेश और अफ्रीका को वित्तीय मदद देने के बाद उनका प्रभाव विश्व राजनीति में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यूएस ने जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत को साथ लेकर वैकल्पिक रास्ते अपनाने की योजना बनाई है। चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने की अपनी रणनीति के तहत पहले चरण में ट्रंप के वरिष्ठ अधिकारियों ने वॉशिंगटन के साथ टोक्यो, नई दिल्ली और कैनबेरा को लेकर बड़ी योजना बनाई है। प्लान है कि इस कूटनीतिक गठबंधन को आगे भी ले जाया जाएगा।

अमेरिकी विदेश मंत्री के भारत दौरे में बना प्लान

अमेरिका के विदेश मंत्री के दौरों की समीक्षा पर बात करते हुए असिस्टेंट सेक्रटरी ऑफ स्टेट अलाइस वेल्स ने पत्रकारों से बातचीत में बताया, 'जो देश एक जैसे मूल्यों को साझा करते हैं, उनके पास उनके बुनियादी ढांचे में और आर्थिक विकास में निवेश की आवश्यकता के लिए क्षेत्रीय देशों को विकल्प प्रदान करने का अवसर है। इसे सुनिश्चित करने के लिए हम देशों को वह विकल्प मुहैया कराएंगे, जिसमें अनैतिक वित्तपोषण या असुरक्षित ऋण शामिल नहीं है और यह निश्चित रूप से उद्देश्य को पूरा करेगा।'

अगले महीने ट्रंप जाएंगे चीन दौरे पर

यूएस की तरफ से यह प्लान ऐसे समय में आया है जब अगले महीने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पेइचिंग और टॉक्यो दौरे की तैयारी कर रहे हैं। जिस तरह से यूएस की तरफ से इसमें 'अनैतिक वित्तपोषण या असुरक्षित ऋण' नहीं शामिल करने की बात की गई है, उससे साफ है कि यह इशारा कहीं न कहीं चीन की तरफ ही है। नेपाल में मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन (एमसीसी) के तहत करीब 44 अरब 12 करोड़ के प्रॉजेक्ट पर काम होना है, जिसके लिए करीब 8 अरब 43 करोड़ रुपये नेपाल को देने हैं और बाकी पैसा एमसीसी देगा। वेल्स का कहना है कि जिस प्रॉजेक्ट के तहत सड़कों के साथ भारत में ऊर्जा संचरण लाइनों का निर्माण किया जा रहा है, में नेपाल को भी अगले सात साल में एनर्जी एक्सपोर्टर बनने की इजाजत दी जाएगी और भारत-नेपाल के बीच बड़ी जिम्मेदारी से कनेक्टिविटी का निर्माण करना होगा।

अमेरिका-भारत और जापान के बीच पहले से है साझेदारी

अमेरिका, भारत और जापान के बीच पहले से ही उत्पादक त्रिपक्षीय साझेदारी को उजागर करते हुए वेल्स ने कहा कि इसमें ऑस्ट्रेलिया स्वभाविक साझीदार होगा और वॉशिंगटन की तरफ से आने वाले समय में जल्द ही इस 'कूटनीतिक चतुर्भुज' बैठक की योजना बनाई जा रही है। वेल्स का कहना है, 'बड़ी बात यह है कि एक जैसे मूल्यों को साझा करने वाले देशों को कैसे एक मंच पर लाया जाए और फिर उन मूल्यों का इस्तेमाल कैसे वैश्विक स्तर पर किया जाए।

कुछ जानकारों का कहना है कि जैसे चीन ओआरआबी के जरिए अपने सबसे बड़े रणनीतिक खेल की शुरुआत कर रहा है उसे देखते हुए अमेरिका भी ऐसी योजना बना रहा है। ओआरओबी का विरोध करने वाले पहले सिर्फ भारत था, लेकिन अब भारत को इसमें अमेरिका का भी साथ मिला है, जिसका मानना है कि यह कुछ और नहीं बल्कि किसी अन्य नाम के साथ की जा रही 'एक तरफा लाभ वाला अर्थशास्त्र' है।


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