राजनीति

योगी सरकार का चुनावी दांव, अति पिछड़ों-अति दलितों को अलग से आरक्षण !

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 23 , 2018 , 08:15 IST

यूपी सरकार पिछड़ों और अतिदलितों को लुभाने के लिए आरक्षण का दांव खेलने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया है कि अगर जरूरत पड़ी तो अति दलितों और अति पिछड़ों को आरक्षण देंगे। इसके लिए हम लोग एक कमेटी बनाने जा रहे हैं।

योगी ने विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कहा सरकार एक रूप रेखा तय कर रही है जिससे ये सुनिश्चित किया जा सके कि दलितों और पिछड़ी जातियों के आरक्षण पर खास जाति या समूहों का ही कब्जा ना रह जाए, बल्कि इसका फायदा दूसरी उप जातियां भी उठा सके। यूपी विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा, “बीजेपी सरकार इस बात को लेकर प्रतिबद्ध है कि दलित और पिछड़ी जातियों का आरक्षण किसी खास वर्ग तक सीमित ना रहकर सभी वर्गों तक पहुंचे, इस बार में रूप रेखा तय करने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। सीएम ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद इसे ग्रुप तीन और ग्रुप चार की सरकारी नौकरियों के लिए लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास से वंचित हर दलित और गरीब का ख्याल रखेगी, क्योंकि आजादी के बाद उन्हें मुख्यधारा में लाने की जरूरत है। सीएम ने कहा कि उन्होंने कहा, ‘‘हम बिना किसी भेदभाव के रोजगार देंगे। पूर्व में लेन-देन हुआ करता था। क्या कोई राज्य लोक सेवा आयोग की नौकरी के लिये 40 से 60 लाख रुपये लिये जाने के बारे में सोच सकता है? जांच रिपोर्ट आने दीजिये, जो भी दोषी होगा वह जेल जाएगा और उनकी सम्पत्ति कुर्क की जाएगी।‘‘ योगी ने कहा कि राज्य सरकार इस महीने 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारेगी। अगले तीन साल के दौरान 20 लाख युवाओं को रोजगार दिया जाएगा अगर सभी निवेश परियोजनाएं जमीन पर उतरीं तो इससे 35 लाख लोगों को नौकरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि शासन की कार्यपद्धति कैसी हो, हमने यह दिखाने की कोशिश की है। नेता प्रतिपक्ष राम गोविन्द चौधरी अपने आंकड़ों को ठीक कर लेते तो अच्छा होता, उन्हें लगता है कि बजट सम्बन्धी आंकड़ों को अगर वह फिर देख लेंगे तो अच्छा होगा। चौधरी बोलते ज्यादा और करते कम हैं।

राजनाथ भी कर चुके हैं लागू: आरक्षण में आरक्षण का दिया था फॉर्मूला-

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह जब 2001 में यूपी के सीएम थे तो उन्होंने अति पिछड़ों और अति दलितों का आरक्षण कोटा तय किया था। उनका व भाजपा का तर्कथा कि पिछड़ों और दलितों के लिए निर्धारित आरक्षण का लाभ कुछ खास जातियों (यादव और जाटव) के बीच ही सीमित रह जाता है। तब वरिष्ठ मंत्री हुकुम सिंह की अध्यक्षता में सामाजिक न्याय समिति गठित की गई थी।

हाल ही में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में हार के बाद योगी के इस ऐलान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि जातीय गोलबंदी की वजह से एसपी प्रत्याशी ने इन दोनों हाई प्रोफाइल सीटों पर जीत दर्ज की। बीजेपी की नजर अब सोशल इंजिनियरिंग के जरिए दोनों पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लगाने पर है।

गौरतलब है कि योगी सरकार का यह फैसला बेहद अहम है, क्योंकि अब तक आरक्षण को लेकर विपक्ष बीजेपी के साथ-साथ आरएसएस को घेरता रहा है। कुछ महीनों पहले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने आरक्षण पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि आरक्षण से अलगाव पैदा होता है और इसे खत्म होना चाहिए।


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