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गूगल की गलती का दुरुपयोग कर स्वार्थी तत्व आधार को लेकर फैला रहे अफवाह: UIDAI

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 6 , 2018 , 12:39 IST

आधार की गोपनीयता पर चल रहे विवाद के बीच कुछ ऐंड्रॉयड स्मार्टफोनों में आधार के हेल्पलाइन नंबर सेव होने पर उस विवाद ने नया मोड़ ले लिया। हालांकि गूगल ने अपनी इस गलती पर तुरंत माफी तो मांगी पर अब UIDAI ने कहा कि कुछ शरारती तत्व छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्वों ने गूगल की एक भूल का दुरुपयोग कर आधार की छवि खराब करने और लोगों के बीच भय फैलाने का प्रयास किया है। UIDAI ने न सिर्फ बयान जारी किया बल्कि ट्विटर पर भी सिलसिलेवार ट्वीट कर बताया कि गूगल की गलती का फायदा कुछ निहित स्वार्थ वाले उठा रहे हैं और आधार के खिलाफ डर का माहौल बना रहे हैं।

UIDAI ने अपने बयान में कहा कि आधार का विरोध करने वाले गूगल से हुई गलती का इस्तेमाल आधार के खिलाफ डर फैलाने के लिए कर रहे हैं। हेल्पलाइन नंबर से डेटा को नहीं चुराया जा सकता।

अथॉरिटी ने कहा कि ट्विटर और वॉट्सऐप जैसे कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह अफवाह फैलाया जा रहा है कि यह नंबर (ऐंड्रॉयड फोन में सेव आधार हेल्पलाइन नंबर) नुकसान पहुंचा सकता है और इससे आधार डेटा चोरी हो सकता है, लिहाजा हेल्पलाइन नंबर को तुरंत डिलीट किया जाना चाहिए। अथॉरिटी ने कहा कि सिर्फ हेल्पलाइन नंबर से डेटा चोरी नहीं हो सकता, इसलिए नंबर को डिलीट करने की जरूरत नहीं है।

प्राधिकरण ने आज कहा कि गूगल की एक गलती से उसका (प्राधिकरण का) पुराना हेल्पलाइन नंबर 18003001947 कई मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं की कांटैक्ट लिस्ट में आ गया था। अफवाह फैलाने वालों ने उसी को लेकर आधार की छवि खराब करने की कोशिश की।

प्राधिकरण ने बयान में कहा कि वह ऐसे निहित स्वार्थी तत्वों के प्रयास की ‘निंदा’ करता है जिन्होंने गूगल की एक ‘भूल’ का दुरुपयोग आधार के खिलाफ अफवाह फैलाने के लिए किया।

प्राधिकरण ने कहा है कि कांटैक्ट लिस्ट में किसी हेल्पलाइन नंबर से किसी फोन की सूचनाएं नहीं चुरायी जा सकती। इसलिये इस नंबर को मिटाने में कोई डर नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे कोई नुकसान नहीं है। यदि लोग चाहते हैं तो वे उसकी जगह यूआईएडीआई के नये हेल्पलाइन नंबर 1947 को रख सकते हैं।

गौरतलब है कि फ्रांस का साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ होने का दावा करने वाले एक ट्विटर यूजर ने पिछले सप्ताह ट्वीट कर इस अफवाह को जन्म दिया था। उसने प्राधिकरण को संबोधित करते हुए इस ट्वीट में कहा था कि अलग-अलग मोबाइल फोन सेवा कंपनियों के ग्राहक जिनके पास आधार कार्ड है या नहीं और जिन्होंने एमआधार एप का इस्तेमाल भी नहीं किया है, उनके भी फोन की कांटैक्ट सूची में आपका हेल्पलाइन नंबर उन्हें बताये बिना क्यों दर्ज कर दिया गया है?

इसके बाद सोशल मीडिया पर आधार के खिलाफ अफवाहों का दौर चलने लगा था जिसके कारण सरकार भी हरकत में आयी और गूगल को बयान जारी कर अपनी भूल माननी पड़ी।


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