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मूवी रिव्यू: परफॉर्मेंस दमदार, लेकिन बिखरी हुई कहानी है 'वोदका डायरीज'

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| जनवरी 19 , 2018 , 13:56 IST

'वोदका डायरीज' शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई हैं। कुशल इस फिल्म से बतौर डायरेक्टर डेब्यू कर रहे हैं। अगर आप किसी फिल्म के दमदार ट्रेलर को देख कर उसे सिनेमाहाल में देखने जाते हैं या फिर किसी बड़े स्टार के लिए उस फिल्म को देखने जाते हैं तो ऐसे कई मौके आएंगे जब आपको निराश होना पड़े। अगर फिल्म की कहानी अच्छी न हो तो बड़े से बड़ा एक्टर उसे हिट नहीं करवा सकता। फिल्म ‘वोदका डायरीज’ से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने वाले कुशल श्रीवास्तव की ये फिल्म भी ऐसी ही है।

कहानी-

फिल्म की कहानी मनाली (हिमाचल प्रदेश) में बेस्ड है, जहां एसीपी अश्विनी दीक्षित (केके मेनन) अपनी पत्नी शिखा दीक्षित के साथ रहता है। अश्विनी के मातहत अंकित (शारिब हाशमी ) काम करता है। अचानक से सिलसिलेवार घटनाओं के अंतर्गत बहुत सारे क़त्ल होने लगते हैं और शक की सुई अलग-अलग  लोगों के ऊपर जाने लगती है। क़त्ल के पीछे का सच जानने के लिए अश्विनी अपनी टीम के साथ शिनाख्त में लग जाता है। कहानी में बहुत से अलग किरदारों की एंट्री भी होती हैं। अब क्या अश्विनी सच्चाई का पता लगा पता है, क्या ट्विस्ट टर्न्स आते हैं, इसका पता आपको फिल्म देखकर ही चल पाएगा।

डायरेक्शन-

फिल्म का डायरेक्शन ठीक है लेकिन फिल्म की पूरी कहानी बिखरी हुई है। फिल्म में तालमेल का अभाव है। डायरेक्टर क्या दिखाना चाहता है समझना मुश्किल है। फर्स्ट हॉफ के बाद फिल्म समझ में नहीं आती है। हालांकि, फिल्म के अंत में जब सस्पेंस खुलता है, उस पर ऑडियंस सोचने को मजबूर हो जाती है।

एक्टिंग-

केके मेनन एक बेहतरीन कलाकार है, लेकिन इस फिल्म में वे अपना प्रभाव नहीं छोड़ा पाए हैं। ज्यादातर फिल्म उनके ईद-गिर्द ही घूमती है। मंदिरा बेदी कई सीन्स में ओवर एक्टिंग करतीं नजर आईं हैं। राइमा ने अपने रोल के हिसाब से अभिनय किया है।

कमज़ोर कड़ियां-

फिल्म कमजोर कड़ी इसकी कहानी है। ख़ास तौर पर फ़्लैश बैक और प्रेजेंट डे बार-बार आपको कन्फ्यूज करते हैं कि आखिरकार हो क्या रहा है। हालांकि कहानी का वन लाइनर बहुत बढ़िया है कि मर्डर के पीछे कारण क्या है? इसको अच्छी लिखावट और संवादों के माध्यम से सजाया जा सकता था। फिल्म का फर्स्ट हाफ ठीक-ठाक है, लेकिन जैसे ही क्लाइमेक्स आता है, आपके जेहन में एक बात चलती है कि इससे बेहतर एंडिंग की जा सकती थी। फिल्म का कोई गीत भी रिलीज से पहले हिट नहीं हो पाया है।

म्यूजिक-

फिल्म का म्यूजिक ठीक है। रेखा भारद्वाज द्वारा गाया गाना 'सखी री...' अच्छा बन पड़ा है।


देखें या नहीं-

अगर आप थ्रिलर मूवी देखना पसंद करते हैं और केके मेनन के फैन है तो ही फिल्म देखने जाए।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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