नेशनल

क्या है 'आदर्श सोसाइटी मामला' जिसमें अशोक चव्हाण को राहत मिली है, जानिये

अमितेष युवराज सिंह | न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
366
| दिसंबर 22 , 2017 , 16:46 IST

मुंबई के हाईप्रोफाइल आर्दश सोसाइटी मामले में महाराष्ट्र के पूर्व सीएम अशोक चव्हाण को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली है। अब चव्हाण पर इस मामले में कोई केस नहीं चलेगा। हाईकोर्ट ने अशोक चव्हाण पर केस चलाने की अनुमति देने वाले राज्यपाल के आदेश को खारिज कर दिया है।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के कोलाबा में आदर्श हाउसिंग सोसाइटी बनाई थी। यह 31 मंजिला पॉश इमारत युद्ध में मारे गए सैनिकों की विधवाओं और भारतीय रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए बनाई गई थी।

क्या था आदर्श सोसाइटी मामला

सोसाइटी बनने के कुछ सालों बाद एक आरटीआई से यह खुलासा हुआ कि तमाम नियमों को ताक पर रखकर सोसाइटी के फ्लैट ब्यूरोक्रैट्स, राजनेताओं और सेना के अफसरों को बेहद कम दामों में बेचे गए। इस घोटाले का पर्दाफाश 2010 में हुआ था। इस मामले में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हान को इस्तीफा देना पड़ा था।

2

इस मामले की जांच के लिए 2011 में महाराष्ट्र सरकार ने दो सदस्यीय न्यायिक कमिशन का गठन किया। इसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस जेए पाटिल ने की। 2 साल तक इस समिति ने 182 से ज्यादा गवाहों से पूछताछ की और अप्रैल 2013 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कुल 25 फ्लैट गैरकानूनी तौर पर आवंटित किए गए थे। इनमें से 22 फ्लैट फर्जी नाम से खरीदे गए थे।

इस रिपोर्ट में महाराष्ट्र के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों का भी नाम आया। इनमें अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और शिवाजीराव निलंगेकर पाटिल शामिल थे। इनके अलावा दो पूर्व शहरी विकास मंत्री राजेश तोपे और सुनील ततकारे और 12 ब्यूरोक्रैट्स के नाम रिपोर्ट में गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर शामिल किया गया। जिन लोगों को फ्लैट आवंटित किया गया था उनमें देवयानी खोब्रागड़े का भी नाम था।

Maxresdefault

आदर्श सोसाइटी को लेकर एक मामला यह भी है कि यह इमारत बेहद संवेदनशील तटवर्ती क्षेत्र में बनाई गई है। यह नौसेना की जमीन पर बनाया गया और इसके निर्माण से पहले नौसेना से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' नहीं लिया गया। 21 दिसंबर 2010 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि यह सीधे-सीधे धोखेबाजी का मामला है। पर्यावरण नियमों को दरकिनार करने की वजह से केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सिफारिश की कि इस इमारत को तीन महीने के अंदर गिरा दिया जाए।


कमेंट करें