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ब्रेस्‍ट में क्यों होता है ब्लड क्लॉट? जानें क्या हैं इसके लक्षण और बचाव के उपाय

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 28 , 2018 , 18:54 IST

भारत में महिलाओं में कैंसर के मामलों में 27 प्रतिशत मामले ब्रेस्‍ट कैंसर के हैं। इस तरह की परेशानी महिलाओं को 30 वर्ष की उम्र में शुरू होती है, जो आगे चलकर 50 से 64 वर्ष की उम्र में भी हो सकती है। ब्‍लड क्‍लॉट को मेडिकल भाषा में ब्रेस्‍ट हेमाटोमा कहा जाता है और इसके कई सारे कारण होते हैं।

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ये तब होता है जब ब्रेस्‍ट के टिश्‍यूज़ में खून निकलने लगता है जिसकी वजह से रक्‍त का जमाव हो जाता है। इसका प्रमुख कारण खेल के दौरान कोई गंभीर चोट या कार दुर्घटना हो सकती है। कमजोर रक्‍त वाहिकाओं पर कोई सख्‍त दबाव बनने से भी हेमाटोमा हो सकता है।

ब्रेस्‍ट कैंसर के कुछ लक्षणों में ब्रेस्‍ट या बगल में गांठ बन जाना,ब्रेस्‍ट के निप्पल से खून आना, स्तन की त्वचा पर नारंगी धब्बे पड़ना, ब्रेस्‍ट में दर्द होना, गले या बगल में लिम्फ नोड्स के कारण सूजन होना आदि प्रमुख हैं। कभी-कभी ब्रेस्‍ट कैंसर में ब्रेस्‍ट सर्जरी के बाद भी क्‍लॉट बन सकता है। हेमाटोमा किसी कॉस्‍मेटिक सर्जिकल प्रोसीजर जैसे ब्रेस्‍ट रिडक्‍शन या ऑग्‍मेंटन सर्जरी की वजह से भी हो सकता है।

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बता दे की ब्रेस्‍ट कैंसर से ग्रस्‍त लोगों में ब्‍लड क्‍लॉट का खतरा ज्‍यादा रहता है। कैंसर के ईलाज और कैंसर की वजह से ब्‍लड क्‍लॉट बनने का खतरा बहुत ज्‍यादा बढ़ जाता है। अगर ब्रेस्‍ट कैंसर अन्‍य हिस्‍सों में भी फैल रहा है तो इससे भी ब्‍लड क्‍लॉट बनने का खतरा बढ़ जाता है। ब्‍लड क्‍लॉट हानिकारक होता है लेकिन इसका ईलाज संभव है। इसके लक्षण और संकेत दिखने के बाद आपको तुरंत डॉक्‍टर के पास जाना चाहिए।

आंकड़ों के मुताबिक, 28 में से किसी एक महिला को लाइफ में कभी न कभी ब्रेस्‍ट कैंसर होने का अंदेशा रहता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मुताबिक, भारतीय महिलाओं में छोटी उम्र में ही स्तन कैंसर होने लगा है। जागरूकता की कमी और रोग की पहचान में देरी के चलते उपचार में कठिनाई भी आती है।

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सामान्‍य ब्‍लड क्‍लॉट बनने की वजह कोई चोट के अलावा अन्‍य कोई कारण भी हो सकता है। इसके पीछे कोई और वजह भी हो सकती है। शरीर में आंतों और नसों में क्‍लॉट बन सकता है। कई बार क्‍लॉट शरीर के दूसरे हिस्‍सों में भी फैलना लगता है। जब ब्‍लड क्‍लॉट की वजह से रक्‍त वाहिकाओं में खून रूक जाता है तो ऐसे में ब्‍लड क्‍लॉट हानिकारक होता है जिससे पूरे शरीर के कई हिस्‍सों में रक्‍त प्रवाह रूक जाता है।

जब कैंसर के मरीज़ को कीमोथेरेपी दी जाती है तो उसकी कोशिकाओं को खत्‍म कर दिया जाता है। इससे एक ऐसा पदार्थ निकलता है जो की ब्‍लड क्‍लॉट का कारण बन सकता है। सर्जिकल प्रोसीजर के साथ कीमोथेरेपी में कैंसर मरीज़ों में रक्‍त वाहिकाओं की दीवारें क्षतिग्रस्‍त हो जाती हैं। इसकी वजह से ब्‍लड क्‍लॉट का खतरा भी बढ़ जाता है। कैंसर के मरीजों में बड़ी नसों में एक लंबी अंतःशिरा रेखा (एक केंद्रीय रेखा) डाली जाती है और ये सब कीमोथेरेपी और अन्‍य दवाओं के असर के लिए किया जाता है। नसों के सिरे पर ब्‍लड क्‍लॉट बनने की संभावना ज्‍यादा रहती है।

हालांकि, कुछ ऐसी दवाएं भी मौजूद हैं जो ब्‍लड क्‍लॉट को बनने से रोकती हैं। कैंसर को भी अक्रियाशील किया जा सकता है। कैंसर के मरीज़ में कमजोरी आ जाती है जिस वजह से वो शारीरिक रूप से कम क्रियाशील हो जाता है। कुछ ना करने पर भी ब्‍लड क्‍लॉट बनने लगता है।


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