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संसद ने ग्रेच्युटी विधेयक पर लगाई मुहर, 20 लाख तक की रकम पर नहीं लगेगा टैक्स

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 22 , 2018 , 18:44 IST

ग्रेच्युटी से संबंधित उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को गुरुवार को संसद की मंजूरी मिल गई। पुराने ग्रैच्युटी कानून में संशोधन के बाद अब 20 लाख रुपये तक की ग्रैच्युटी टैक्स फ्री हो गई। विधेयक में निजी क्षेत्र और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्‍वायत्‍त संगठनों के ऐसे कर्मचारियों के उपदान (ग्रेच्यूटी) की अधिकतम सीमा में वृद्धि का प्रावधान है, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अनुसार सीसीएस (पेंशन) नियमावली के अधीन शामिल नहीं हैं।

कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन और आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने समेत अन्य मुद्दों पर विभिन्न दलों के भारी हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है। नए कानून में प्राइवेट सेक्टर और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्‍वायत्‍त संगठनों के कर्मचारियों के ग्रैच्यूटी की अधिकतम सीमा में वृद्धि का प्रावधान है।

आज भी इन्हीं मुद्दों पर सदन में हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही बैठक शुरू होने के करीब 20 मिनट बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। लेकिन ग्रेच्युटी से संबंधित उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार के अनुरोध पर बिना चर्चा के, सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

आपको कितनी ग्रैच्यूटी मिलेगी यह दो कारकों पर निर्भर है। i) मंथली बेसिक सैलरी, ii) नौकरी में कितने साल बिताए। यदि आप एक ही कंपनी में 5 साल या इससे अधिक समय तक नौकरी करते हैं तो ग्रैच्यूटी के हकदार हो जाते हैं। अभी दस या इससे अधिक लोगों को रोजगार देने वाले निकायों के लिए ग्रैच्यूटी पेमेंट कानून 1972 लागू है।

जिसके तहत कारखानों, खानों, तेल क्षेत्रों, बागानों, पत्तनों, रेल कंपनियों, दुकानों या अन्य प्रतिष्ठानों में लगे कर्मचारी शामिल हैं जिन्होंने 5 वर्ष की नियमित सेवा प्रदान की है।

कानून की धारा 4 के अधीन ग्रैच्यूटी की अधिकतम सीमा वर्ष 2010 में 10 लाख रुपये रखी गई थी। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के बाद केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिये ग्रैच्यूटी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया। अब प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलेगा।

विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में कहा गया है कि उपदान संदाय संशोधन विधेयक 2017 में अन्य बातों के साथ साथ अधिनियम की धारा 2क का संशोधन करने का प्रावधान किया गया है जिससे सरकार को निरंतर सेवा विधेयक में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर 'प्रसूति छुट्टी की अवधि' को अधिसूचित किया जाए।

ऐसा इसलिये किया गया क्योंकि प्रसूति सुविधा संशोधन अधिनियम 2017 के माध्यम से प्रसूति छुट्टी की अवधि को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया था। ऐसे में केंद्र सरकार को वर्तमान 12 सप्ताह की अवधि को ऐसी अन्य अवधि के लिये अधिसूचित करने की बात कही गई है।

टिप्पणियां इसके तहत दस लाख रुपये शब्द के स्थान पर ‘एक ऐसी रकम जो केंद्रीय सरकार द्वारा समय समय पर अधिसूचित की जाए’ शब्द रखने के लिये अधिनियम की धारा 4 का संशोधन करने का प्रस्ताव है।


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